ITR Refund नहीं आया? प्रोसेस्ड होने के बाद भी क्यों अटक जाता है टैक्स रिफंड, जानिए बड़े कारण और समाधान

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नेशनल डेस्क: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने के बाद कई करदाताओं को 24 घंटे के भीतर टैक्स रिफंड मिल जाता है, जबकि कुछ लोगों को कई सप्ताह तक इंतजार करना पड़ता है। यदि आपका ITR प्रोसेस हो चुका है लेकिन रिफंड अभी तक खाते में नहीं आया है, तो इसके पीछे कई तकनीकी और सत्यापन से जुड़े कारण हो सकते हैं।

आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल के अनुसार, 4 अगस्त तक 6 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके थे। इनमें 5.65 करोड़ से अधिक रिटर्न का सत्यापन और 3.63 करोड़ से अधिक रिटर्न प्रोसेस किए जा चुके हैं।

ITR प्रोसेस होने के बाद भी क्यों अटक जाता है रिफंड?
विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार आयकर विभाग की ओर से रिफंड जारी होने के बावजूद राशि बैंक खाते में ट्रांसफर नहीं हो पाती। इसकी सबसे सामान्य वजह बैंक खाते की जानकारी या सत्यापन में त्रुटि होती है।

रिफंड अटकने के प्रमुख कारणों में गलत बैंक खाता संख्या, निष्क्रिय पैन, बैंक खाते का पूर्व सत्यापन न होना, पैन और बैंक खाते में दर्ज नाम का मेल न खाना, गलत आईएफएससी कोड, बंद या निष्क्रिय बैंक खाता, तकनीकी समस्या या बैंक की ओर से लेनदेन अस्वीकार किया जाना शामिल हैं।

इसके अलावा पिछले वर्षों की बकाया कर मांग के समायोजन या आयकर रिटर्न, टीडीएस अथवा आय संबंधी विवरण में किसी प्रकार की विसंगति होने पर भी रिफंड में देरी हो सकती है।

रिफंड आने में कितना समय लग सकता है?
ITR प्रोसेस होने का मतलब यह नहीं है कि रिफंड तुरंत बैंक खाते में पहुंच जाएगा। कई मामलों में रिफंड 24 घंटे के भीतर जारी हो जाता है, जबकि कुछ मामलों में इसमें चार से पांच सप्ताह तक का समय लग सकता है।

यदि इस अवधि के बाद भी रिफंड प्राप्त नहीं होता है तो करदाता को ई-फाइलिंग पोर्टल पर रिफंड की स्थिति जांचनी चाहिए। साथ ही आयकर विभाग की ओर से भेजे गए ईमेल और एसएमएस को भी ध्यान से देखना चाहिए, क्योंकि किसी विसंगति की स्थिति में विभाग सूचना भेज सकता है।

रिफंड पाने के लिए किन शर्तों का पूरा होना जरूरी है?
आयकर रिफंड प्राप्त करने के लिए रिटर्न सही तरीके से दाखिल होना चाहिए। करदाता का पैन और आधार आपस में लिंक होना आवश्यक है। इसके अलावा ई-फाइलिंग खाते की जानकारी अद्यतन होनी चाहिए और बैंक खाते का सत्यापन भी पूरा होना चाहिए। रिटर्न में रिफंड का दावा भी सही तरीके से किया जाना जरूरी है।

टैक्स नोटिस को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
यदि आयकर विभाग को रिटर्न में कोई विसंगति मिलती है तो वह करदाता को नोटिस या सूचना भेज सकता है। ऐसे मामलों में समय पर जवाब देना जरूरी होता है। यदि करदाता नोटिस का जवाब नहीं देता या बकाया कर मांग का निपटारा नहीं करता, तो रिफंड समायोजित किया जा सकता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि करदाता नियमित रूप से अपने ई-फाइलिंग खाते और पंजीकृत ईमेल की जांच करें। किसी भी संदिग्ध ईमेल, लिंक या संदेश पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक माध्यमों से ही जानकारी प्राप्त करें।

 

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