नासा का ‘आर्टेमिस-2’ मिशन सफल, चांद के पास पहुंचकर सुरक्षित लौटे अंतरिक्ष यात्री; 10 दिन की यात्रा ने रचा इतिहास

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का बहुप्रतीक्षित ‘आर्टेमिस-2’ मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इस मिशन में शामिल चारों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित धरती पर लौट आए हैं। शनिवार सुबह अंतरिक्ष यान ने सैन डिएगो तट के पास सफल लैंडिंग की। करीब 10 दिन तक चले इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों ने 6,90,000 मील से ज्यादा की दूरी तय की। इस ऐतिहासिक सफलता के बाद अब नासा अगले चरण ‘आर्टेमिस-3’ की तैयारियों में जुट गया है, जिसमें इंसानों को चांद की सतह पर उतारने की योजना है।

लैंडिंग के साथ खत्म हुआ ऐतिहासिक मिशन, नासा ने किया स्वागत
अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी पर नासा ने लैंडिंग का वीडियो साझा करते हुए उनका स्वागत किया। मिशन में शामिल रीड, विक्टर, क्रिस्टीना और जेरेमी ने चंद्रमा के पास पहुंचकर सफलतापूर्वक अपनी यात्रा पूरी की। यह मिशन मानव अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

तकनीकी दिक्कतों के बाद मिली कामयाबी
इस मिशन को पहले फरवरी में लॉन्च किया जाना था, लेकिन हाइड्रोजन ईंधन के रिसाव और हीलियम प्रेशर लाइन में खराबी के कारण इसे टालना पड़ा। कई तकनीकी सुधारों के बाद आखिरकार मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह 50 साल से अधिक समय बाद पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन रहा, जिसने अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय जोड़ा।

विविधता से भरा दल, ‘अपोलो’ युग से अलग नई शुरुआत
इस मिशन की खास बात इसका विविध दल रहा। इसमें एक महिला, एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री और एक गैर-अमेरिकी सदस्य शामिल थे। यह 1968-1972 के ‘अपोलो’ कार्यक्रम से अलग एक नया और समावेशी कदम है, जो अंतरिक्ष अभियानों में बदलते दौर को दर्शाता है।

फ्लोरिडा से ऐतिहासिक उड़ान, हजारों लोगों ने देखा नजारा
‘आर्टेमिस-2’ ने फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी, जहां से पहले ‘अपोलो’ मिशन भी लॉन्च किए गए थे। इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए हजारों लोग मौके पर मौजूद रहे। आसपास के समुद्र तट और सड़कें भी लोगों से भरी रहीं, जिससे पुरानी यादें ताजा हो गईं।

10 दिन की यात्रा में क्या-क्या हुआ?
इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने पहले 25 घंटे पृथ्वी की कक्षा में रहकर अंतरिक्ष यान की जांच की। इसके बाद मुख्य इंजन चालू कर उन्हें चंद्रमा की दिशा में भेजा गया। अंतरिक्ष यान चंद्रमा के पास से गुजरा और उससे करीब 6,400 किलोमीटर आगे जाकर यू-टर्न लिया। इसके बाद यह सीधे प्रशांत महासागर में उतरा। इस यात्रा के साथ ही ये अंतरिक्ष यात्री अब तक सबसे दूर तक जाने वाले इंसान बन गए।

स्पेस में पहली बार इस्तेमाल हुईं जरूरी सुविधाएं
‘आर्टेमिस-2’ मिशन में पहली बार जीवन रक्षक उपकरणों के साथ पानी और शौचालय जैसी जरूरी सुविधाओं का इस्तेमाल किया गया। इससे पहले ‘आर्टेमिस-1’ में कोई मानव सवार नहीं था। इन नई प्रणालियों के परीक्षण के कारण मिशन को अतिरिक्त सावधानी के साथ संचालित किया गया।

चांद पर स्थायी मौजूदगी की दिशा में बड़ा कदम
यह मिशन नासा की उस दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत चांद पर मानव की स्थायी मौजूदगी स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। ‘आर्टेमिस-2’ की सफलता ने इस दिशा में मजबूत आधार तैयार कर दिया है और अब सभी की नजरें ‘आर्टेमिस-3’ पर टिकी हैं।

 

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