‘पापा, मैं फ्लाइट में बैठ गया हूं…’ आखिरी मैसेज आज भी रुला देता है, अहमदाबाद विमान हादसे की पहली बरसी पर छलका परिवारों का दर्द

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अहमदाबाद: देश के सबसे दर्दनाक विमान हादसों में शामिल एयर इंडिया फ्लाइट एआई-171 दुर्घटना को आज एक साल पूरा हो गया है, लेकिन इस हादसे में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के जख्म अब भी नहीं भर पाए हैं। 12 जून 2025 को लंदन जा रही एयर इंडिया की उड़ान अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद एक मेडिकल कॉलेज परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस भीषण हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी। एक साल बाद भी कई परिवार सदमे से बाहर नहीं निकल पाए हैं और कुछ लोग आज भी हवाई यात्रा करने से डरते हैं।

बेटे का आखिरी मैसेज बन गया जिंदगी भर का दर्द

दीव निवासी रफीक अरब के लिए 12 जून 2025 की तारीख कभी नहीं भूलने वाली है। इस हादसे में उन्होंने अपने 25 वर्षीय बेटे फैजान को खो दिया था, जो ब्रिटेन में इस्लामिक अध्ययन की पढ़ाई कर रहा था और परिवार से मिलने के बाद वापस लौट रहा था। उड़ान से ठीक पहले फैजान ने अपने पिता को एक संदेश भेजा था—”पापा, मैं फ्लाइट में बैठ गया हूं और मैं जा रहा हूं।”

रफीक अरब बताते हैं कि उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनके बेटे का आखिरी संदेश होगा। हादसे के बाद से उन्होंने हवाई यात्रा पूरी तरह छोड़ दी है। उनका कहना है कि अब आसमान में उड़ते विमान की आवाज भी उन्हें उस भयावह दिन की याद दिला देती है, जब कुछ ही पलों में 260 जिंदगियां खत्म हो गई थीं।

‘हवाई जहाज की आवाज सुनते ही दिल कांप उठता है’

रफीक अरब के मुताबिक, उनके परिवार के लिए यह सदमा आज भी उतना ही गहरा है। फैजान की मां और दोनों छोटे भाई अब भी उसकी कमी महसूस करते हैं। परिवार के लिए हर गुजरता दिन उस दर्द को फिर से जिंदा कर देता है, जिसे वे कभी भूल नहीं पाएंगे।

पहली विदेश यात्रा बनी आखिरी सफर

सूरत की रहने वाली मुक्ति वांसडिया ने इस हादसे में अपने माता-पिता दिव्या और अर्जुनसिंह को खो दिया था। दोनों अपनी जिंदगी की पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर लंदन जा रहे थे, जहां उनकी बड़ी बेटी रहती थी। मुक्ति बताती हैं कि मध्यमवर्गीय परिवार के लिए विदेश यात्रा किसी सपने से कम नहीं थी और उनके माता-पिता इस सफर को लेकर बेहद उत्साहित थे।

उन्होंने याद करते हुए कहा कि यात्रा से पहले उन्होंने अपने माता-पिता को समझाया था कि अगर उड़ान के दौरान झटके महसूस हों तो घबराना नहीं। लेकिन किसे पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।

एयरपोर्ट पर विदाई का वह पल आज भी आंखों के सामने है

मुक्ति ने बताया कि एयरपोर्ट पर विदाई के दौरान उन्होंने अपनी मां के पैर छुए, लेकिन जल्दबाजी में पिता के पैर छूना भूल गईं। बाद में वह वापस दौड़कर गईं और पिता का आशीर्वाद लिया। पिता ने उनकी पीठ थपथपाई थी। मुक्ति कहती हैं कि वह स्पर्श और वह पल आज भी उनकी स्मृतियों में जिंदा है।

एक फोन कॉल ने बदल दी पूरी जिंदगी

माता-पिता के रवाना होने के कुछ घंटों बाद जब मुक्ति अपने भाई-बहनों के साथ वडोदरा में थीं, तभी एक फोन कॉल ने उनकी दुनिया पूरी तरह बदल दी। विमान हादसे की खबर ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। माता-पिता को खोने के बाद मुक्ति गहरे अवसाद में चली गईं। उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और लंबे समय तक काउंसलिंग का सहारा लिया।

आज वह एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम कर रही हैं, लेकिन हादसे की यादें अब भी उनका पीछा नहीं छोड़तीं। विमान दुर्घटना की पहली बरसी पर एक बार फिर उन परिवारों का दर्द सामने आया है, जिनकी जिंदगी उस एक हादसे ने हमेशा के लिए बदल दी।

एक साल बाद भी नहीं भरे जख्म

अहमदाबाद विमान हादसे को भले ही एक साल बीत चुका हो, लेकिन अपनों को खोने वाले परिवारों के लिए समय जैसे वहीं थम गया है। किसी के लिए बेटे का आखिरी मैसेज यादों में जिंदा है तो कोई माता-पिता की आखिरी मुस्कान को आज भी नहीं भूल पाया। पहली बरसी पर पूरे देश ने उन 260 लोगों को याद किया, जिनकी जिंदगी उस दर्दनाक हादसे में खत्म हो गई थी।

 

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