फ्रांस के दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी, G7 समिट में दुनिया के नेताओं संग करेंगे मंथन; पहली बार स्लोवाकिया भी जाएंगे

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने यूरोप के अहम दौरे पर जाने वाले हैं। इस दौरे में वह फ्रांस में आयोजित होने वाले 52वें G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और इसके बाद स्लोवाकिया का ऐतिहासिक दौरा भी करेंगे। भारत और यूरोप के बीच तेजी से मजबूत होते रणनीतिक और व्यापारिक रिश्तों के लिहाज से इस यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियां-ले-बां शहर में आयोजित G7 समिट में ‘आउटरीच पार्टनर’ के तौर पर शामिल होंगे। इस दौरान वह पेरिस और नीस का भी दौरा करेंगे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विशेष आमंत्रण पर पीएम मोदी इस सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं।

G7 समिट में इन बड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

G7 सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता कई अहम वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक नियमन, क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन, जलवायु परिवर्तन, व्यापारिक तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और यूक्रेन व पश्चिम एशिया के हालात जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी साल 2019 से लगातार G7 समिट में हिस्सा लेते आ रहे हैं। वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को देखते हुए इस बार भी उनकी मौजूदगी को काफी अहम माना जा रहा है।

क्या ट्रंप से होगी पीएम मोदी की मुलाकात?

G7 समिट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल होने वाले हैं। ऐसे में पीएम मोदी और ट्रंप की संभावित मुलाकात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि अब तक दोनों नेताओं के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

दोनों नेताओं की आखिरी आमने-सामने मुलाकात फरवरी 2025 में हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच कई बार फोन पर बातचीत जरूर हुई है। हाल के महीनों में भारत-पाकिस्तान मुद्दे पर ट्रंप के बयानों, भारत पर टैरिफ और कुछ विवादित टिप्पणियों को लेकर दोनों देशों के रिश्तों में हल्की तल्खी भी देखने को मिली थी। हालांकि व्यापारिक समझौते को लेकर बातचीत जारी रहने से हालात सामान्य माने जा रहे हैं।

स्लोवाकिया दौरे से बनेगा नया इतिहास

फ्रांस के बाद प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया का दौरा करेंगे। खास बात यह है कि 1993 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली स्लोवाकिया यात्रा होगी।

इस दौरे को दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ते सहयोग का बड़ा संकेत माना जा रहा है। इससे पहले स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी भारत आ चुके हैं, जहां दोनों नेताओं के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

ऑटोमोबाइल, रक्षा और टेक्नोलॉजी पर रहेगा फोकस

भारत और स्लोवाकिया के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार हाल ही में 1.3 अरब यूरो के पार पहुंच चुका है।

स्लोवाकिया को “यूरोप का डेट्रायट” भी कहा जाता है, क्योंकि वहां बड़े पैमाने पर कार निर्माण होता है। फॉक्सवैगन, किआ और स्टेलेंटिस जैसी कंपनियों के अलावा भारतीय कंपनी टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली जगुआर लैंड रोवर का बड़ा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी वहीं स्थित है।

दौरे के दौरान ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी, परमाणु ऊर्जा, स्पेस टेक्नोलॉजी और AI जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रह सकता है।

यूरोप के साथ मजबूत हो रही भारत की साझेदारी

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा यूरोप के साथ भारत की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का बड़ा संकेत माना जा रहा है। हाल के वर्षों में भारत ने यूरोपीय देशों के साथ व्यापार, टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और सुरक्षा सहयोग को तेजी से मजबूत किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका को नई मजबूती दे सकती है।

 

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