PM मोदी की अपील का दिखने लगा असर, केंद्रीय मंत्रियों से लेकर कई मुख्यमंत्रियों ने घटाया काफिला, ईंधन बचत अभियान को मिला राष्ट्रीय समर्थन

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील का असर अब देशभर में दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद केंद्र और राज्यों के कई बड़े नेताओं ने अपने आधिकारिक काफिलों का आकार कम करना शुरू कर दिया है। साथ ही सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहनों और कारपूलिंग जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने की पहल भी तेज हो गई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से ईंधन की खपत कम करने और ऊर्जा संरक्षण को अपनाने की अपील की थी। इसके बाद राजनीतिक स्तर पर इसे लेकर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बुधवार को अपने-अपने आवासों से छोटे काफिलों के साथ रवाना हुए। इसे प्रधानमंत्री के संदेश के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में आधे किए जाएंगे सरकारी काफिले के वाहन

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राज्यवासियों से ईंधन बचत और ऊर्जा दक्षता को अपनाने की अपील की। यूपी सरकार ने आधिकारिक काफिलों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की संख्या में 50 प्रतिशत तक कटौती करने का निर्देश जारी किया है।

इसके साथ ही अधिकारियों को जहां संभव हो, वर्चुअल मीटिंग और वर्क फ्रॉम होम अपनाने के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने सार्वजनिक परिवहन, साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ साप्ताहिक “वाहन निषेध दिवस” मनाने का सुझाव भी दिया।

मध्य प्रदेश में CM मोहन यादव ने घटाया काफिला

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने आधिकारिक काफिले में वाहनों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर दी है। राज्य सरकार ने वाहन रैलियों पर रोक लगाने के साथ मंत्रियों और अधिकारियों को अनावश्यक वाहन उपयोग से बचने के निर्देश दिए हैं।

सरकार ने बड़े औपचारिक जुलूसों से दूरी बनाने और ईंधन की बचत को प्राथमिकता देने की बात कही है।

दिल्ली में कारपूलिंग और मेट्रो यात्रा को बढ़ावा

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि सरकारी कार्यों के लिए अब कम से कम वाहनों का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री, विधायक, अधिकारी और जनप्रतिनिधि कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देंगे।

इस पहल के तहत दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद और कपिल मिश्रा मेट्रो से अपने कार्यालय पहुंचे। इसे सरकार की ईंधन बचत नीति का व्यावहारिक संदेश माना जा रहा है।

राजस्थान और महाराष्ट्र में भी सख्त निर्देश

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को काफिले में वाहनों की संख्या सीमित रखने और सुरक्षा व्यवस्था में अनावश्यक वाहनों की तैनाती से बचने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों को सभी विभागों में इसी तरह की व्यवस्था लागू करने को कहा।

वहीं महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी विमानों के उपयोग पर सख्ती बढ़ा दी है। अब गैर-जरूरी हवाई यात्रा के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कार्यालय से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

भाजपा विधायक संजय उपाध्याय अपने साथियों के साथ मुंबई से चिपलुन तक ट्रेन से पहुंचे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित को देखते हुए वह आगे भी लोकल ट्रेन का उपयोग जारी रखेंगे।

गुजरात में हेलीकॉप्टर छोड़ सार्वजनिक परिवहन अपनाने की पहल

गुजरात में राज्यपाल ने घोषणा की है कि वह राज्य के भीतर यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर और विमान की बजाय ट्रेन, राज्य परिवहन बस और अन्य सार्वजनिक साधनों का उपयोग करेंगे। साथ ही सरकारी काफिलों का आकार भी छोटा किया जाएगा।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के काफिले में वाहनों की संख्या घटाकर केवल तीन कर दी गई है। वहीं उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने ईंधन बचत के मद्देनजर अपनी अमेरिका यात्रा रद्द कर दी।

बिहार में इलेक्ट्रिक वाहन और सीमित यात्रा पर जोर

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन करते हुए इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। राज्य के कई मंत्रियों और गठबंधन नेताओं ने भी इस अभियान का समर्थन किया है।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि उन्होंने अपने वाहनों की संख्या आधी कर दी है और केवल जरूरत पड़ने पर ही आधिकारिक यात्रा करेंगे। भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह ने भी जनता से इस पहल का समर्थन करने की अपील की।

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच बढ़ी चिंता

राजनीतिक नेतृत्व की यह देशव्यापी प्रतिक्रिया ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ईंधन आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार गहरा रही हैं। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारें ऊर्जा संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

 

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