242 करोड़ का ‘टावर ऑफ जस्टिस’ बना गुरुग्राम की नई पहचान, इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर समेत मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं
गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम में 242 करोड़ रुपये की लागत से तैयार अत्याधुनिक ‘टावर ऑफ जस्टिस’ का उद्घाटन कर दिया गया है। आधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस यह न्यायिक परिसर न केवल साइबर सिटी की न्यायिक पहचान को नई मजबूती देगा, बल्कि भविष्य में यहां इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर शुरू होने के बाद वैश्विक स्तर पर भी इसकी अहमियत बढ़ने की उम्मीद है।
लगभग सात एकड़ क्षेत्र में निर्मित इस न्यायिक परिसर को आधुनिक न्यायिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उद्घाटन के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इसकी सराहना करते हुए कहा कि देश के अन्य शहरों में भी इसी तरह की सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए।
56 अदालतों के साथ अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित परिसर
टावर ऑफ जस्टिस में कुल 56 न्यायालय बनाए गए हैं। इसके अलावा अत्याधुनिक न्यायिक सेवा केंद्र, सम्मेलन कक्ष, वादकारियों के लिए प्रतीक्षा क्षेत्र, महिला और पुरुष लॉकअप, सर्वर एवं सीसीटीवी कक्ष, क्रेच तथा मातृ एवं शिशु देखभाल कक्ष जैसी कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।
परिसर में अलग एस्केलेटर ब्लॉक, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था, सीसीटीवी नेटवर्क, लैन सिस्टम और निर्बाध विद्युत आपूर्ति जैसी तकनीकी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे न्यायिक कार्यवाही अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी हो सके।
जेल से ही होगी आरोपियों की पेशी
टावर ऑफ जस्टिस की सभी अदालतों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा से जोड़ा गया है। इसके जरिए जेल में बंद आरोपियों की पेशी सीधे अदालत में कराई जा सकेगी। इससे सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव कम होगा और समय की भी बचत होगी।
530 वाहनों की पार्किंग और कई आधुनिक सुविधाएं
परिसर में कुल 530 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है, जिसमें 130 वाहन मुख्य भवन और 400 वाहन मल्टीलेवल बेसमेंट पार्किंग में खड़े किए जा सकेंगे।
इसके अलावा अधिवक्ताओं के लिए बार रूम, बार लाइब्रेरी, कैंटीन, सार्वजनिक भोजनालय, न्यायाधीशों के लिए डाइनिंग एरिया, जिम और अन्य प्रशासनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर से बढ़ेगी वैश्विक पहचान
भविष्य में इस परिसर में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के संरक्षण में इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर का संचालन किया जाएगा। इसके शुरू होने के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों से जुड़े व्यावसायिक विवादों का निपटारा गुरुग्राम में ही संभव हो सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अभी कई कंपनियों को आर्बिट्रेशन के लिए जेनेवा, लंदन और न्यूयॉर्क जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है। गुरुग्राम में यह सुविधा उपलब्ध होने से देश-विदेश के कारोबारी यहां आएंगे, जिससे शहर की वैश्विक पहचान और निवेश की संभावनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।
साइबर सिटी को मिली नई न्यायिक पहचान
सूचना के अनुसार, टावर ऑफ जस्टिस उत्तर भारत का पहला ऐसा अत्याधुनिक न्यायिक परिसर है, जिसमें आधुनिक तकनीक, डिजिटल सुविधाएं और नागरिकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। इससे गुरुग्राम की पहचान केवल औद्योगिक और सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में ही नहीं, बल्कि आधुनिक न्यायिक अवसंरचना वाले शहर के रूप में भी मजबूत होगी।