नई दिल्ली: सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू हो चुका है। इस पूरे माह में भगवान शिव की आराधना के साथ कई प्रमुख व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक है श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी, जिसे पवित्रोपना एकादशी और पवित्र एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर संतान सुख की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
कब रखा जाएगा श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत?
वर्ष 2026 में श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त, रविवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 23 अगस्त को सुबह 2:00 बजे प्रारंभ होगी और 24 अगस्त को सुबह 4:18 बजे समाप्त होगी।
व्रत का पारण 24 अगस्त को दोपहर 1:41 बजे से शाम 4:16 बजे के बीच किया जाएगा।
क्या है श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण पुत्रदा एकादशी विशेष रूप से संतान प्राप्ति की कामना करने वाले दंपत्तियों के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना और व्रत करने से योग्य, दीर्घायु, बुद्धिमान और संस्कारी संतान का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है।
मान्यता यह भी है कि इस व्रत के प्रभाव से जीवन के अनेक कष्ट, रोग और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। साथ ही श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी की पूजा विधि
इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान पुत्रदा एकादशी व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है। सुबह सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें और भगवान विष्णु के सहस्त्रनाम का पाठ करें।
व्रत के दौरान अन्न का सेवन नहीं किया जाता। विशेष रूप से एकादशी के दिन चावल खाने से परहेज करने की परंपरा है। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद निर्धारित शुभ मुहूर्त में करना चाहिए।