कांग्रेस की महारैली पर संकट! CTI ने सोनिया गांधी से की रद्द करने की मांग, 12 हजार करोड़ के कारोबार पर पड़ सकता है असर

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नई दिल्ली: दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर 2026 को प्रस्तावित कांग्रेस की मेगा रैली को लेकर व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली टालने की अपील की है। संगठन का कहना है कि रैली के कारण दिल्ली के 20 प्रमुख बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है। इससे करीब 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये के व्यापार पर संकट खड़ा होने की आशंका है।

CTI ने चेतावनी दी है कि रैली के चलते राजधानी में भारी यातायात जाम लग सकता है। इससे बाजारों तक ग्राहकों और व्यापारियों की पहुंच बाधित होगी। संगठन ने मांग की है कि रैली दिवाली के बाद आयोजित की जाए। यदि इसे टालना संभव नहीं है तो आयोजन स्थल बदलकर बुराड़ी मैदान कर दिया जाए।

‘रोजी-रोटी बचाने की विनती’

CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि संगठन रैली का विरोध नहीं कर रहा है, बल्कि दीपावली के व्यस्त कारोबारी मौसम में व्यापारियों की रोजी-रोटी बचाने की अपील कर रहा है। उन्होंने कहा कि 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दीपावली है। ऐसे में 1 नवंबर त्योहार की तैयारियों के लिहाज से कारोबार का सबसे अहम दिन है।

बृजेश गोयल के मुताबिक, यदि 1 नवंबर को 10 लाख लोग और 15 से 20 हजार वाहन मध्य दिल्ली पहुंचते हैं तो 20 ऐतिहासिक बाजारों का रोजाना होने वाला 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार ठप हो सकता है।

CTI ने जताई चार बड़ी आशंकाएं

1. पार्किंग की कमी से बिगड़ सकते हैं हालात

CTI ने अपने पत्र में कहा है कि रामलीला मैदान में 200 बड़ी बसों को खड़ा करने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। रैली में 10 लाख लोगों को लाने के लिए 15 हजार से 20 हजार बसों, कारों और टेंपो की जरूरत पड़ सकती है। इन वाहनों को जेएलएन मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग, नेताजी सुभाष मार्ग, अजमेरी गेट और चांदनी चौक रोड समेत आसपास के इलाकों में खड़ा करना पड़ेगा।

संगठन का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के पहुंचने से जगह की कमी हो जाएगी। इसके चलते मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली में भारी जाम लग सकता है और हालात लॉकडाउन जैसे बन सकते हैं।

2. पांच किलोमीटर के दायरे में 20 से ज्यादा प्रमुख बाजार

CTI के अनुसार, रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के 20 से अधिक प्रमुख थोक और खुदरा बाजार हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार, किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट, अजमेरी गेट-पहाड़गंज और दरियागंज शामिल हैं।

संगठन का दावा है कि ये बाजार करीब 300 साल पुराने हैं और देशभर में सामान की आपूर्ति करते हैं। दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों से रोजाना करीब 5 हजार ट्रक और टेंपो इन बाजारों में माल लेकर आते हैं। वहीं, यहां से लगभग 3 हजार ट्रक रोजाना गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत समेत एनसीआर के 25 शहरों और देश के दूसरे राज्यों में सामान पहुंचाते हैं।

3. 31 अक्टूबर से ही शुरू हो सकता है असर

CTI ने आशंका जताई है कि रैली के कारण 31 अक्टूबर की दोपहर से ही दिल्ली की सीमाओं पर बसों और अन्य वाहनों का पहुंचना शुरू हो सकता है। इनमें सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर बॉर्डर शामिल हैं। संगठन के मुताबिक, शाम से बहादुर शाह जफर मार्ग और जेएलएन मार्ग पर बैरिकेडिंग भी की जा सकती है।

CTI का कहना है कि ट्रांसपोर्टर 31 अक्टूबर से ही दिल्ली में गाड़ियां भेजने से मना कर रहे हैं। ऐसे में कारोबार पर असर केवल 1 नवंबर को नहीं, बल्कि एक दिन पहले से ही पड़ना शुरू हो सकता है।

4. जंतर-मंतर पर पहले भी लग चुका है लंबा जाम

संगठन ने 10 अक्टूबर का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दिन जंतर-मंतर पर केवल 5 हजार से 7 हजार लोग पहुंचे थे, लेकिन इसके बावजूद मध्य दिल्ली में करीब आठ घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही थी। CTI का कहना है कि अब प्रस्तावित रैली में 10 लाख लोगों के पहुंचने की बात है, ऐसे में यातायात व्यवस्था पर बड़ा दबाव पड़ सकता है।

CTI ने सोनिया गांधी के सामने रखीं ये मांगें

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने सोनिया गांधी से अपील की है कि 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली को दिवाली के बाद यानी 10-11 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए, ताकि धनतेरस और दीपावली के दौरान व्यापार प्रभावित न हो।

संगठन ने दूसरा विकल्प देते हुए कहा है कि यदि रैली तय तारीख पर ही आयोजित करनी है तो इसे रामलीला मैदान के बजाय बुराड़ी मैदान में कराया जाए। CTI के मुताबिक, वहां करीब 15 हजार वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था हो सकती है।

कब और क्यों हो रही है महारैली?

दिल्ली में 1 नवंबर 2026 को इंडिया गठबंधन की मेगा रैली प्रस्तावित है। इसका आयोजन रामलीला मैदान में होना है। रैली का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष की चिंताओं को उठाना है।

 

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