डिजिटल फ्रॉड पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बैंक की लापरवाही से ठगी हुई तो देना होगा मुआवजा; तय होगी जवाबदेही

0 25

नई दिल्ली: देश में बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को निर्देश दिया है कि वह अपने प्रस्तावित नियामक ढांचे के तहत आने वाले सभी अधिकृत वित्तीय संस्थानों की सूची पेश करे। कोर्ट ने कहा है कि यदि बैंक या वित्तीय संस्थान की लापरवाही के कारण धोखाधड़ी होती है तो पीड़ितों को हुए नुकसान के बराबर मुआवजा देने की व्यवस्था होनी चाहिए।

पीड़ितों को नुकसान के बराबर मिले मुआवजा

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि प्रस्तावित नियमों में पीड़ितों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई का प्रावधान होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि पैसे खाते से निकलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय संदिग्ध लेन-देन को पहले ही रोकने के लिए सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।

सीजेआई सूर्यकांत ने जताई चिंता

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस बात पर निराशा जताई कि मीडिया में लगातार खबरें आने और लोगों को जागरूक करने के प्रयासों के बावजूद डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी के मामले सामने आ रहे हैं।

अदालत ने कहा कि वह आरबीआई के प्रस्तावित केवाईसी संशोधन निर्देश, 2026 की भी जांच करेगी। इन निर्देशों को 30 नवंबर तक अधिसूचित किए जाने और दिसंबर तक लागू होने की उम्मीद है।

एमिकस क्यूरी ने 2.5 करोड़ रुपये की ठगी का किया जिक्र

सुनवाई के दौरान अदालत की मदद कर रहे एमिकस क्यूरी ने बताया कि डिजिटल फ्रॉड के मामले लगातार जारी हैं। उन्होंने पिछले सप्ताह की एक घटना का जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर एक महिला से 2.5 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी।

एमिकस क्यूरी ने कहा कि गिरफ्तारी का डर ऐसे मामलों में पीड़ितों को ठगों की मांग मानने के लिए मजबूर करने वाला बड़ा कारण है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि पीड़ितों को सम्मोहित जैसी स्थिति में रखा गया था।

मोबाइल पर गिरफ्तारी के डर पर सीजेआई की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि मोबाइल फोन पर गिरफ्तारी की धमकी से लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने टिप्पणी की कि लोग ठगों की धमकियों पर भरोसा करने के बजाय न्यायपालिका की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर कथित अदालती आदेश की वास्तविकता की जांच कर सकते हैं।

सीजेआई ने यह सवाल भी उठाया कि यदि पढ़े-लिखे और जानकारी रखने वाले लोग भी इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं तो वे अगली पीढ़ी को क्या सिखाएंगे।

संदिग्ध लेन-देन को कुछ समय के लिए रोकने का सुझाव

सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि बैंक ऐसे लेन-देन को अस्थायी रूप से रोकने की व्यवस्था करें, जो ग्राहक के खाते में पहले होने वाली गतिविधियों से बिल्कुल अलग हों। अदालत के मुताबिक, यदि किसी खाते में अचानक असामान्य रकम का लेन-देन दिखाई देता है तो बैंक को तुरंत सतर्क होकर कार्रवाई करनी चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि केवल दिशानिर्देश जारी करना या रकम ट्रांसफर होने के बाद जांच करना पर्याप्त नहीं है। संदिग्ध लेन-देन को समय रहते रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।

पुलिस को अलर्ट भेजकर कराया जाए भौतिक सत्यापन

अदालत ने सुझाव दिया कि ग्राहक के खाते में असामान्य गतिविधि दिखने पर बैंक कुछ समय के लिए लेन-देन रोकें और स्थानीय पुलिस को स्वचालित अलर्ट भेजें। इसके बाद पुलिस के जरिए ग्राहक का भौतिक सत्यापन कराया जा सकता है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि लेन-देन उसकी सहमति से हो रहा है या वह किसी धोखाधड़ी का शिकार है।

व्हाट्सऐप ने 9,400 संदिग्ध खाते किए प्रतिबंधित

सुनवाई के दौरान व्हाट्सऐप ने अदालत को बताया कि उसने 9,400 संदिग्ध खातों को प्रतिबंधित किया है। कंपनी ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए डिवाइस में ‘किल स्विच’ और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने वाले सॉफ्टवेयर पर विचार किए जाने की जानकारी भी दी।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.