राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर चंपत राय का पहला बयान, बोले- ‘जिम्मेदारी मेरी थी, लेकिन हेराफेरी में कोई भूमिका नहीं’
अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले की जांच के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पहली बार अपना पक्ष रखा है। पुलिस के समक्ष दर्ज कराए गए बयान में उन्होंने चढ़ावे की कथित चोरी या हेराफेरी में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि चढ़ावे की सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उनके पद के तहत आती थी।
सूत्रों के अनुसार, चंपत राय ने पुलिस को बताया कि जैसे ही उन्हें चढ़ावे में गड़बड़ी की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल सक्रिय होकर कार्रवाई शुरू कराई। उनका दावा है कि संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में उनकी पहल महत्वपूर्ण रही।
‘खबर मिलते ही कार्रवाई कराई’
पुलिस के सामने दिए गए बयान में चंपत राय ने कहा कि उन्हें जैसे ही चढ़ावे में हेरफेर की सूचना मिली, उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया और आवश्यक कदम उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में पकड़े गए आरोपियों तक पहुंचने में उन्होंने सहयोग किया, लेकिन कथित गबन या हेराफेरी में उनकी कोई भूमिका नहीं रही।
उन्होंने यह भी कहा कि चढ़ावे में किसी प्रकार की अनियमितता न हो, इसकी जवाबदेही उनकी थी और इस नैतिक जिम्मेदारी से वह पीछे नहीं हट रहे हैं।
इस्तीफे के बाद दर्ज कराया बयान
चढ़ावा विवाद के बाद चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद चंपत राय जांच एजेंसियों के समक्ष अपना बयान दर्ज कराने पहुंचे। माना जा रहा है कि जांच के आगे बढ़ने के साथ ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी विस्तृत पूछताछ की जा रही है।
अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार
राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले में पुलिस अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों में रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं।
सभी आरोपियों को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मामले में अगली सुनवाई 13 जुलाई को होने की संभावना है।
बैंकों तक पहुंची जांच
जांच एजेंसियों ने मामले की वित्तीय कड़ियों को खंगालना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक समेत करीब आधा दर्जन बैंकों को नोटिस भेजे गए हैं। पुलिस ने संबंधित खातों, लेनदेन और लॉकरों की जानकारी मांगी है।
जांच टीम यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित हेराफेरी की रकम का इस्तेमाल कहीं निजी संपत्ति या अन्य निवेश में तो नहीं किया गया।
70 से 80 लोग जांच के दायरे में
सूत्रों के मुताबिक, मामले की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। करीब 70 से 80 लोगों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है। इनमें ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारी, बैंक कर्मी और चढ़ावे की गिनती व प्रबंधन प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोग शामिल हो सकते हैं।
ट्रस्ट की अगली बैठक पर टिकी नजर
चढ़ावा विवाद के बाद ट्रस्ट की आगामी बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में आगे की प्रशासनिक और संगठनात्मक कार्रवाई पर अंतिम फैसला बैठक में लिया जाएगा।
जांच एजेंसियां जहां वित्तीय दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं, वहीं आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।