राम मंदिर ट्रस्ट के खाते में 1882 करोड़ रुपये! नए CEO जीतेंद्र मिश्रा के सामने 5 बड़े काम, चढ़ावे से लेकर 2000 कर्मचारियों तक संभालेंगे व्यवस्था

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अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में करीब छह साल बाद प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ है। रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब चढ़ावे में गड़बड़ी, निगरानी व्यवस्था और मंदिर प्रशासन से जुड़े कई सवाल सामने आ चुके हैं। सीईओ के आने के बाद मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्था में नीति और उसके क्रियान्वयन के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा होने की संभावना है।

अब तक ट्रस्ट के पदाधिकारी, अलग-अलग समितियां और संबंधित अधिकारी मिलकर मंदिर की व्यवस्थाएं संभालते रहे हैं। नई व्यवस्था में एक केंद्रीय कार्यकारी अधिकारी के जरिए विभागवार जवाबदेही, वित्तीय निगरानी, कर्मचारियों के प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और निर्माण एवं विकास कार्यों की निगरानी को व्यवस्थित किया जाएगा।

चढ़ावे में गड़बड़ी के बाद तेज हुई CEO की जरूरत

राम मंदिर में सीईओ व्यवस्था की चर्चा एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद और तेज हुई। रिपोर्ट में गिनती कक्ष की निगरानी व्यवस्था और चढ़ावे में सेंध से जुड़ी घटनाओं के दौरान सामने आई कमियों का उल्लेख किया गया था। गिनती कक्ष में प्रवेश करने वाले लोगों की निगरानी, सीसीटीवी और प्रक्रिया से जुड़ी खामियों की ओर भी रिपोर्ट में इशारा किया गया।

इसके बाद यह सवाल उठा कि इतने बड़े धार्मिक संस्थान के रोजमर्रा के संचालन के लिए क्या केवल ट्रस्ट पदाधिकारियों और अलग-अलग समितियों पर निर्भर रहना पर्याप्त है या फिर पूर्णकालिक पेशेवर कार्यकारी व्यवस्था की जरूरत है। सीईओ नियुक्ति के पीछे धार्मिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से अलग करना भी अहम माना जा रहा है।

CEO के आने से क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव जिम्मेदारी तय करने के स्तर पर होगा। अभी बड़े कामों के लिए ट्रस्ट, समितियों और संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय करना पड़ता है। सीईओ के आने के बाद रोजमर्रा के संचालन के लिए एक प्रमुख कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी। इससे अलग-अलग विभागों के कामकाज की निगरानी और फैसलों के क्रियान्वयन को अधिक केंद्रीकृत किया जा सकेगा।

राम मंदिर CEO के सामने होंगे ये 5 बड़े काम

1. चढ़ावे और वित्तीय व्यवस्था की निगरानी

दान और चढ़ावे में गड़बड़ी रोकने के लिए बेहतर लेखा व्यवस्था लागू करना सीईओ की अहम जिम्मेदारियों में शामिल होगा। इसके लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट और वित्तीय विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी, ताकि ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था की निगरानी मजबूत की जा सके।

2. करीब 2000 कर्मचारियों का सुपरविजन

मंदिर की सुरक्षा, सफाई और प्रबंधन से जुड़े करीब 1500 से 2000 कर्मचारियों के कामकाज की निगरानी भी सीईओ के स्तर पर होगी। कर्मचारियों की जिम्मेदारियां तय करने से लेकर उनकी कार्यप्रणाली की निगरानी तक प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करना बड़ी चुनौती होगी।

3. निर्माण और बुनियादी ढांचे की निगरानी

राम मंदिर परिसर में बचे हुए निर्माण कार्यों को पूरा कराना भी सीईओ की प्रमुख जिम्मेदारियों में रहेगा। इसके अलावा सीसीटीवी नेटवर्क को दुरुस्त रखने और ट्रस्ट के फैसलों को जमीन पर लागू कराने की जिम्मेदारी भी उनके पास होगी।

4. श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन

राम मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना अहम काम होगा। त्योहारों और विशेष अवसरों पर भीड़ बढ़ने की स्थिति में पुलिस और प्रशासन के साथ समन्वय कर श्रद्धालुओं की आवाजाही की योजना तैयार करना भी सीईओ की जिम्मेदारी होगी।

5. ट्रस्ट और सरकार के बीच समन्वय

सीईओ मंदिर ट्रस्ट बोर्ड और उसके चेयरमैन के अधीन काम करेंगे। उनकी भूमिका ट्रस्ट और राज्य सरकार के साथ-साथ पुलिस एवं प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने की भी होगी। इससे मंदिर से जुड़े प्रशासनिक मामलों में विभिन्न संस्थाओं के बीच तालमेल को बेहतर बनाने की कोशिश होगी।

ट्रस्ट के बैंक खातों में 1882 करोड़ रुपये

मणिराम दास छावनी में हुई बैठक में ट्रस्ट के वित्तीय वर्ष 2025-26 का वार्षिक लेखा-जोखा भी रखा गया। इसमें बताया गया कि वर्ष के दौरान ट्रस्ट की करीब 237 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि 91 करोड़ रुपये का व्यय हुआ। निर्माण समेत अलग-अलग कार्यों पर करीब 425 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई। बैठक में यह भी बताया गया कि 21 मार्च 2026 तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बैंक खातों में करीब 1882 करोड़ रुपये की राशि मौजूद थी।

 

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