ब्राजील चुनाव में लूला की जीत, ट्रंप पर निशाना साध बोले- हमारा देश किसी का पिछवाड़ा नहीं

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ब्रासीलिया: ब्राजील के राष्ट्रपति लुइस इनासियो लूला डा सिल्वा ने चुनाव में जीत के बाद अमेरिकी नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि ब्राजील किसी दूसरे देश का पिछवाड़ा नहीं है। उनके इस बयान को लैटिन अमेरिका में अमेरिकी प्रभाव पर कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव में लूला ने कंजर्वेटिव उम्मीदवार फ्लेवियो बोल्सोनारो को हराकर एक बार फिर राष्ट्रपति पद हासिल किया। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमन, लोकतंत्र की रक्षा और शासन में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने का भी वादा किया।

‘ब्राजील किसी का पिछवाड़ा नहीं’

दोबारा जीत के बाद साओ पाउलो में अपने संबोधन में लूला ने स्पष्ट किया कि ब्राजील अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश की चुनावी राजनीति में अमेरिका के साथ संबंध और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

फ्लेवियो बोल्सोनारो ने चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप प्रशासन के साथ करीबी संबंध बनाने और अमेरिका के साथ बेहतर व्यापार समझौते करने पर जोर दिया था। इसके विपरीत लूला ने अमेरिकी व्यापार नीतियों और वाशिंगटन के संगठित अपराध से निपटने के तरीकों की आलोचना की।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमन पर जोर

लूला ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को नियंत्रित करने के लिए नियमों की जरूरत है। उनके मुताबिक, चुनाव अभियान के दौरान डिजिटल माध्यमों से विदेशी हस्तक्षेप की चुनौती का मुकाबला करना महत्वपूर्ण रहा।

उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए मतदान को जरूरी बताया। लूला का कहना था कि चुनाव में भागीदारी के जरिए लोगों को यह समझाने की कोशिश की गई कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए उनकी भूमिका अहम है।

कांटे के मुकाबले में मिली जीत

चुनाव के शुरुआती रुझानों में दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। खबर में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 78 प्रतिशत से अधिक मतों की गिनती के दौरान लूला को 51.21 प्रतिशत और फ्लेवियो बोल्सोनारो को 48.79 प्रतिशत वोट मिले थे। इसके बाद चुनाव प्राधिकरण ने लूला की जीत की पुष्टि की।

फ्लेवियो बोल्सोनारो सीनेटर हैं और जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के बेटे हैं। उन्होंने अमेरिका के साथ संबंध मजबूत करने और बेहतर व्यापार समझौते हासिल करने को अपने चुनाव अभियान का अहम हिस्सा बनाया था।

राजनीतिक मतभेदों के बीच साथ काम करने का वादा

लूला ने जीत के बाद कहा कि वह केवल अपने समर्थकों के लिए नहीं, बल्कि देश के सभी नागरिकों के लिए सरकार चलाएंगे। उन्होंने कंजर्वेटिव नेतृत्व वाली कांग्रेस के साथ भी काम करने की प्रतिबद्धता जताई।

उन्होंने शासन के तरीके में बदलाव और नीतियां बनाने की प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने की बात कही। चुनाव के दौरान देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण गहरा रहा, ऐसे में लूला के सामने अलग-अलग विचारधाराओं के बीच सहमति बनाने की चुनौती होगी।

गरीबी घटाने के रिकॉर्ड पर लूला को समर्थन

लूला के समर्थकों ने गरीबी कम करने और वंचित समुदायों के लिए किए गए उनके काम को समर्थन का प्रमुख आधार बताया। दूसरी ओर, फ्लेवियो बोल्सोनारो के समर्थकों ने महंगाई, करों और लूला के राजनीतिक खेमे पर भ्रष्टाचार के आरोपों को मुद्दा बनाया।

दोनों खेमों के बीच यह मुकाबला ब्राजील की राजनीति में लंबे समय से जारी वैचारिक संघर्ष का हिस्सा रहा। पिछले चुनाव में भी लूला और जेयर बोल्सोनारो के बीच बेहद करीबी मुकाबला हुआ था।

अमेरिका-ब्राजील संबंधों पर क्या होगा असर?

चुनाव अभियान के दौरान अमेरिका की व्यापार नीति और संगठित अपराध से निपटने के तौर-तरीकों को लेकर लूला ने ट्रंप प्रशासन की आलोचना की थी। वहीं, फ्लेवियो बोल्सोनारो ने अमेरिका के साथ बेहतर व्यापारिक रिश्तों की वकालत की थी। उन्होंने दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई।

ब्राजील के पास दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार होने का अनुमान है। ऐसे संसाधन वैश्विक व्यापार और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। लूला की जीत के बाद अमेरिका के साथ व्यापार और कूटनीतिक संबंधों की दिशा पर नजर रहेगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव पर नजर रखने की बात कही थी, हालांकि उन्होंने किसी उम्मीदवार का समर्थन करने से इनकार किया था।

 

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