राम मंदिर की सीता रसोई में अब ड्रेस कोड! धोती-पीताम्बरी के बिना नहीं मिलेगा प्रवेश, 8 कर्मचारियों के लिए नया नियम लागू

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अयोध्या: राम मंदिर परिसर स्थित सीता रसोई में अब कोठारी, भंडारी और सेवकों के लिए ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है। रसोई में प्रवेश से पहले सभी कर्मचारियों को पुजारियों की तरह धोती के साथ पीताम्बरी धारण करनी होगी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव गिरि के आदेश के बाद इस व्यवस्था का पालन शुरू हो गया है। इससे पहले सीता रसोई में कर्मचारी धोती-कुर्ता पहनकर सेवा देते थे।

सीईओ ने पहली बार सीता रसोई का किया निरीक्षण

राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जितेंद्र मिश्र ने पहली बार मंदिर परिसर में स्थित सीता रसोई का निरीक्षण किया। उन्होंने रसोई के अंदर प्रवेश किए बिना वहां की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इस दौरान कोठारी और भंडारी से राशन तथा प्रसाद से जुड़े हिसाब-किताब के बारे में जानकारी ली गई।

सीईओ ने यह भी पूछा कि हर महीने कितनी मात्रा में राशन आता है, कितने लोगों के लिए रसोई में भोजन तैयार किया जाता है और कौन-कौन लोग यहां प्रसाद ग्रहण करते हैं। औपचारिक जानकारी लेने के बाद वह वापस लौट गए।

दो शिफ्ट में 8 कर्मचारी संभालते हैं रसोई

परकोटे में मां अन्नपूर्णा के उप मंदिर के पास आधुनिक सीता रसोई स्थापित है। यहां दो शिफ्ट में कुल आठ कर्मचारी सेवा देते हैं। इनमें दो कोठारी, चार भंडारी और दो सेवक शामिल हैं।

भंडारी रामलला सहित मंदिर के सभी देवी-देवताओं के लिए भोग-प्रसाद तैयार करते हैं। वहीं कोठारी भोग-प्रसाद में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का संग्रह करके उसे भंडारी तक पहुंचाते हैं। सेवक सहायक के तौर पर काम करने के साथ रसोई की साफ-सफाई की जिम्मेदारी भी संभालते हैं।

रसोई में ही लागू होगा निर्धारित वेश

राम मंदिर में नियुक्त पुजारियों के लिए पहले से ड्रेस कोड अनिवार्य है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से चार पुराने पुजारियों को छोड़कर 20 पुजारियों को छह महीने का प्रशिक्षण दिया गया था। ये सभी राम मंदिर में रामलला और राम परिवार की शिफ्ट के अनुसार ड्यूटी करते हैं।

हालांकि परकोटे के उप मंदिरों और शेषावतार मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाले पुजारियों और अनुष्ठानकर्ता आचार्यों के लिए ड्रेस कोड लागू नहीं है। उन्हें मानदेय मिलता है, जबकि उनका वेतनमान तय नहीं है। ऐसे पुजारी धोती-कुर्ता में सेवा दे रहे हैं।

अब सीता रसोई के सभी आठ कर्मचारियों को रसोई में प्रवेश से पहले धोती और पीताम्बरी पहननी होगी। घर से मंदिर तक आते-जाते समय वे अपनी पसंद के कपड़े पहन सकते हैं, लेकिन रसोई में प्रवेश निर्धारित वेशभूषा और शुद्धता के साथ ही करना होगा।

अयोध्यावासियों और संतों के लिए अलग दर्शन मार्ग की मांग

हनुमानगढ़ी और कनक भवन की तर्ज पर राम मंदिर में नित्य दर्शन करने वाले अयोध्यावासी गृहस्थों और संतों के लिए आम श्रद्धालुओं तथा पास धारकों से अलग दर्शन मार्ग बनाने की मांग भी जोर पकड़ रही है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी मामले के बाद हुए बदलावों के कारण ट्रस्टियों से सीधे संपर्क करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में इस मांग को लेकर दबाव धार्मिक न्यास समिति की पुनर्गठित कमेटी पर बढ़ रहा है। कमेटी के अधिकांश सदस्य अयोध्यावासी हैं, इसलिए उनसे लगातार इस समस्या के समाधान की मांग की जा रही है।

उम्मीद है कि राम मंदिर ट्रस्ट की दो दिसंबर को प्रस्तावित कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है और समाधान का रास्ता निकल सकता है। धार्मिक न्यास समिति के एक संत ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राम मंदिर में दर्शन के लिए आठ लेन प्रांगण में उपलब्ध स्थान के अनुसार निर्धारित की गई हैं।

आधार कार्ड से सीधे प्रवेश पर भी मंथन

राम मंदिर में अयोध्या के स्थानीय निवासियों को आधार कार्ड की जांच के बाद सीधे प्रवेश देने के प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है। इस व्यवस्था को लेकर सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर पुलिस और प्रशासन की राय महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इसके साथ ही ट्रस्ट यह आकलन भी करा रहा है कि नई व्यवस्था लागू होने पर अयोध्या के स्थानीय साधु-संतों और गृहस्थों में से कितने लोग प्रतिदिन रामलला के दर्शन कर सकेंगे। इसके अनुमान के लिए इस महीने जारी किए गए दैनिक पास की संख्या को आधार बनाया जा रहा है।

 

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