लखनऊ : कैंसर के इलाज में होने वाले भारी खर्च को कम करने और मरीजों को गैर-जरूरी महंगी जांच व दवाओं से बचाने के लिए केंद्र सरकार नई व्यवस्था तैयार कर रही है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और संसद की स्थायी समिति में हुई चर्चा के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय कैंसर की जांच, आधुनिक तकनीक और दवाओं के इस्तेमाल को लेकर व्यापक और मानक रोडमैप तैयार कर रहा है।
हर कैंसर के लिए तय होंगे जांच और इलाज के मानक
प्रस्तावित नीति के तहत यह तय किया जाएगा कि कैंसर के किस प्रकार और किस चरण में कौन-सी जांच, थेरेपी और दवा जरूरी और प्रभावी है। स्वास्थ्य मंत्रालय कैंसर के अलग-अलग चरणों के लिए मानक उपचार प्रोटोकॉल को नए सिरे से अपडेट कर रहा है।
माना गया है कि स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं होने की स्थिति में कई बार मरीजों को ऐसी महंगी जांच या दवाएं भी लिख दी जाती हैं, जिनका प्रभाव सीमित हो सकता है। नई व्यवस्था का उद्देश्य इलाज को तथ्य आधारित बनाना है, ताकि सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और तर्कसंगत हो सके।
इसके साथ ही दवाओं, आधुनिक तकनीक और चिकित्सा मशीनों को तैयार करने में आने वाली लागत तथा उन्हें आम मरीजों तक पहुंचाने की कीमत की भी समीक्षा की जाएगी।
हर जिले में कैंसर जांच के लिए विशेष केंद्र बनाने की तैयारी
सरकार की योजना कैंसर की शुरुआती जांच को गांवों और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने की है। इसके लिए जिला स्तर पर प्राथमिक जांच की सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने से इलाज के कुल खर्च को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
योजना के तहत हर जिले के सरकारी अस्पताल में कैंसर की जांच के लिए विशेष केंद्र स्थापित किए जाएंगे। स्तन, मुंह और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की स्क्रीनिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
जांच रिपोर्ट तैयार करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित टेली-पैथोलॉजी और डिजिटल पैथोलॉजी के इस्तेमाल को भी बढ़ाने की योजना है।
जांच और इलाज कितना असरदार, लागत के हिसाब से होगा आकलन
अलग-अलग कैंसर जांच और उपचार की लागत तथा उनके प्रभाव का आकलन हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट इन इंडिया के जरिए किया जाएगा। इस मुद्दे पर हाल ही में स्वास्थ्य संबंधी संसद की स्थायी समिति के सामने भी चर्चा हुई थी।
कैंसर की दवाओं का भी इसी आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि कौन-सी दवा किस प्रकार के कैंसर में कितनी उपयोगी है और उसके इस्तेमाल से मरीज को कितना लाभ मिल सकता है।