झारखंड में हिंडाल्को पर बढ़ सकता है दबाव: रेड मड सप्लाई मामले की दोबारा जांच के आदेश, विधानसभा में उठा मुद्दा

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झारखंड में मुरी स्थित हिंडाल्को इंडस्ट्रीज से जुड़ा रेड मड आपूर्ति का मामला फिर से चर्चा में आ गया है। विधानसभा में इस मुद्दे के उठने के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की दोबारा जांच कराने का फैसला लिया है। सिल्ली से झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक अमित कुमार ने ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से इस विषय को सदन में उठाया और कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए।

विधायक अमित कुमार ने आरोप लगाया कि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज ने बिना पर्यावरणीय अनुमति के रेड मड की आपूर्ति की। उन्होंने यह भी कहा कि रेड मड तालाब से जुड़ी एक घटना में 25 से 30 लोगों की मौत होने की बात सामने आई थी, जिसकी निष्पक्ष और गंभीर जांच होनी चाहिए।

बिना अनुमति रेड मड सप्लाई पर लगा जुर्माना

मामले पर जवाब देते हुए प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार ने सदन को बताया कि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने बिना पर्यावरणीय अनुमति के लगभग दो लाख टन रेड मड की आपूर्ति राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को किए जाने के मामले में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज पर 37,96,875 रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति दंड लगाया है।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कथित मौतों की घटना को लेकर अब तक किसी मीडिया में प्रमाणित रिपोर्ट सामने नहीं आई है और न ही किसी थाने में इस संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। पहले गठित जांच दल की रिपोर्ट में भी ऐसी किसी घटना की पुष्टि नहीं हुई है।

नई कमेटी करेगी पूरे मामले की जांच

हालांकि विधायक अमित कुमार ने पहले की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए विधानसभा की कमेटी से मामले की जांच कराने की मांग की। इस पर मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार मामले की गंभीरता को देखते हुए नई कमेटी गठित कर दोबारा जांच कराएगी।

मंत्री ने कहा कि यदि पहले की जांच रिपोर्ट और नई जांच रिपोर्ट में अंतर सामने आता है, तो सरकार आवश्यक कार्रवाई करेगी।

सरकारी जमीन की हेराफेरी के आरोप की भी जांच

विधानसभा में इसी दौरान बोकारो जिले के चास अंचल स्थित नारायणपुर मौजा की 21 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। चंदनक्यारी से झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक उमाकांत रजक ने इस मामले को सदन में उठाते हुए सरकारी जमीन की हेराफेरी का आरोप लगाया।

इस पर मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग के सचिव से पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है और अदालत का फैसला आने के बाद सरकार आगे की कार्रवाई करेगी।

फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमीन रजिस्ट्री का आरोप

विधायक उमाकांत रजक ने सदन में कहा कि संबंधित 21 एकड़ जमीन सर्वे के अनुसार गैर आबाद मालिक की श्रेणी में दर्ज थी। इसमें से 1.98 एकड़ जमीन भूमिहीनों को दानपत्र के माध्यम से दी गई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि गैर आबाद जमीन की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा किया गया और सादा हुकूमनामा तैयार कर जमीन की रजिस्ट्री कर ली गई। विधायक के अनुसार एक जनवरी 1946 से पहले के हुकूमनामा के आधार पर जमीन की दर तय की जा रही है, जबकि जमीन की बंदोबस्ती केलू महतो के नाम से दर्ज थी।

विधानसभा में तीखी बहस

मामले को लेकर विधानसभा में तीखी बहस भी देखने को मिली। विधायक उमाकांत रजक ने कहा कि धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेजों के सहारे साजिश के तहत सरकारी जमीन की हेराफेरी की गई है। इस मामले के सामने आने के बाद बोकारो जिला प्रशासन ने प्राथमिकी भी दर्ज कर ली है।

विधायक ने यह भी बताया कि करीब 2.8 एकड़ जमीन पर एक रिजॉर्ट का निर्माण कर लिया गया है। इस पर विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि न्यायालय ने केवल 2.8 एकड़ जमीन पर कार्रवाई पर रोक लगाई है, जबकि बाकी 21 एकड़ जमीन पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि कई मामलों में सरकार उच्च न्यायालय में अपना पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रख पाती, जो चिंता का विषय है।

 

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