एयरलाइंस को बड़ी राहत, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जेट ईंधन 27% सस्ता; घरेलू दरों में कोई बदलाव नहीं

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नई दिल्ली: विमानन क्षेत्र के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में करीब 27 प्रतिशत की बड़ी कटौती की गई है। हालांकि घरेलू उड़ानों के लिए जेट ईंधन की कीमतों को फिलहाल यथावत रखा गया है।

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस कटौती के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमत 400 डॉलर प्रति किलोलीटर से अधिक घटकर करीब 1,100 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोलीटर रह गई है। इससे पहले 1 मई को इसकी कीमतों में 76.55 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोलीटर यानी 5.33 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जिसके बाद दर 1,511.86 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोलीटर पहुंच गई थी।

अप्रैल में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची थीं कीमतें

इससे पहले अप्रैल में वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेज उछाल के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जेट ईंधन की कीमतें बढ़कर 1,435.31 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई थीं। उस समय वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का सीधा असर विमानन उद्योग पर देखने को मिला था।

घरेलू उड़ानों के लिए दरें यथावत

वहीं घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। एयरलाइंस कंपनियां पहले की तरह 1,04,927.18 रुपये प्रति किलोलीटर की दर से ईंधन खरीदती रहेंगी। यह दर 1 अप्रैल से लागू है, जब आवश्यक वृद्धि का केवल एक हिस्सा ही एयरलाइंस पर डाला गया था। तब से घरेलू जेट ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया

सूत्रों के मुताबिक, मई महीने में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन लागत बढ़ने के बावजूद सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ डालने से बचने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की थी। बढ़ी हुई लागत का असर कंपनियों ने स्वयं वहन किया। अब वैश्विक बाजार में दरें नरम पड़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को इसका सीधा लाभ दिया गया है।

वैश्विक बाजार के आधार पर तय होती हैं कीमतें

भारत में जेट ईंधन की कीमतें दो दशक से अधिक समय पहले नियंत्रण मुक्त कर दी गई थीं। इसके बाद से एयरलाइंस के साथ हुए समझौते के तहत कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों के आधार पर तय की जाती हैं।

उद्योग सूत्रों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाया। इसी रणनीति के तहत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन दरों में कमी का लाभ दिया गया, जबकि घरेलू उड़ानों के लिए कीमतों को नियंत्रित स्तर पर बनाए रखा गया है।

 

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