मालवीय नगर अग्निकांड: 21 मौतों के बाद बड़ा खुलासा, 6 कमरों की अनुमति पर चल रहे थे 25 कमरे, 19 घायलों की हालत नाजुक

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दिल्ली: राजधानी के मालवीय नगर इलाके में स्थित एक बेड-एंड-ब्रेकफास्ट होटल में लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली, जबकि 35 लोग घायल हुए। हादसे में घायल 19 लोगों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज शहर के विभिन्न अस्पतालों में जारी है। आग लगने की वास्तविक वजह का अब तक पता नहीं चल पाया है। मामले की जांच कई एजेंसियां कर रही हैं और हादसे से जुड़े हर पहलू की पड़ताल की जा रही है।

मृतकों में 11 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। आग बुधवार को उस समय लगी जब होटल में बड़ी संख्या में लोग ठहरे हुए थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में यह हादसा हुआ, वहां कई स्तरों पर नियमों का उल्लंघन किया गया था।

‘लाल डोरा’ क्षेत्र में बनी थी इमारत

अधिकारियों के अनुसार, हादसे का शिकार हुई इमारत दक्षिणी दिल्ली के हौज रानी गांव स्थित ‘लाल डोरा’ क्षेत्र में बनी हुई थी। इसका मूल निर्माण 1980 के दशक में हुआ था, जबकि वर्ष 2012-13 के दौरान इसका पुनर्निर्माण कराया गया था। यह होटल मुख्य रूप से आसपास के अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को ठहराने के लिए संचालित किया जाता था।

अनुमति छह कमरों की, संचालन 25 कमरों का

जांच में यह भी सामने आया है कि बेड-एंड-ब्रेकफास्ट सुविधा के लिए केवल छह कमरों की अनुमति दी गई थी, लेकिन परिसर में 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि भवन के पास न तो स्वीकृत बिल्डिंग प्लान था और न ही किसी प्रकार का अनुमोदित लेआउट उपलब्ध था। इसके बावजूद इमारत का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।

एमसीडी ने शुरू किया बड़ा अभियान

हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने सख्त रुख अपनाया है। निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, दक्षिण जोन में अवैध रूप से संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की पहचान का काम शुरू कर दिया गया है। नियमों के उल्लंघन में पाए जाने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सीलिंग अभियान चलाया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र का सर्वे कराया जा रहा है और जिन इमारतों में बिना अनुमति के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। निगम ने संकेत दिए हैं कि अगले 48 घंटों के भीतर नियमों का उल्लंघन करने वाली सभी व्यावसायिक संपत्तियों को सील किया जा सकता है।

क्या है ‘लाल डोरा’ क्षेत्र की विशेषता?

‘लाल डोरा’ एक ऐतिहासिक भूमि वर्गीकरण व्यवस्था है, जिसके तहत गांवों के रिहायशी क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित की जाती हैं। परंपरागत रूप से इन इलाकों में निर्माण कार्यों को कई भवन स्वीकृति प्रक्रियाओं से छूट मिली हुई थी। इसी वजह से कई स्थानों पर बिना औपचारिक मंजूरी वाले निर्माण भी मौजूद हैं। अब इस हादसे के बाद ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों और भवन नियमों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

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