साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए बड़ी राहत! अब घर बैठे वापस मिल सकता है फंसा पैसा, सरकार ने शुरू किया नया सिस्टम
नई दिल्ली: ऑनलाइन ठगी का शिकार होने वाले लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर है। साइबर धोखाधड़ी के मामलों में फंसी रकम को वापस दिलाने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने नया डिजिटल सिस्टम शुरू किया है। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था के जरिए पीड़ितों को पैसे की वापसी के लिए लंबे समय तक दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हो सकेगी।
बैंक, पुलिस और कानूनी प्रक्रिया के झंझट होंगे कम
अब तक साइबर ठगी के मामलों में शिकायत दर्ज होने के बाद पीड़ितों को बैंक, पुलिस और अन्य प्रक्रियाओं के बीच लंबा इंतजार करना पड़ता था। कई मामलों में रकम अपराधियों के खातों में फ्रीज होने के बावजूद उसे वापस पाने में महीनों लग जाते थे। इसी समस्या को दूर करने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से जुड़े मोबाइल रेस्टोरेशन मॉड्यूल को शुरू किया गया है।
क्या है मोबाइल रेस्टोरेशन मॉड्यूल?
मोबाइल रेस्टोरेशन मॉड्यूल एक ऑनलाइन रिफंड व्यवस्था है, जिसे साइबर ठगी के मामलों में फ्रीज की गई रकम को पीड़ित तक पहुंचाने की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इस सुविधा के तहत पीड़ित घर बैठे ऑनलाइन रिफंड के लिए आवेदन कर सकेगा। इससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय आसान होने की उम्मीद जताई जा रही है।
डिजिटल दुनिया के साथ बढ़ा साइबर अपराध का खतरा
देश में डिजिटल भुगतान, इंटरनेट बैंकिंग, ऑनलाइन खरीदारी और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं। अब ठगी केवल ओटीपी या बैंक कॉल तक सीमित नहीं रह गई है। डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाएं, पार्ट टाइम नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी, नकली केवाईसी अपडेट, फर्जी ग्राहक सेवा और सोशल मीडिया पर पहचान की नकल कर ठगी जैसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
हर मामले में नहीं मिलेगा रिफंड, पूरी करनी होंगी ये शर्तें
सरकार की यह सुविधा सभी मामलों में स्वतः लागू नहीं होगी। रकम की वापसी के लिए कुछ महत्वपूर्ण शर्तों का पूरा होना जरूरी है। सबसे पहली शर्त यह है कि ठगी की जानकारी मिलते ही तुरंत शिकायत दर्ज कराई गई हो। इसके लिए साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना देना या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करना आवश्यक माना गया है।
दूसरी महत्वपूर्ण शर्त यह है कि ठगी की रकम अपराधी के खाते तक ट्रेस होकर समय रहते फ्रीज कर दी गई हो। यदि रकम अन्य खातों में भेज दी गई हो या निकाल ली गई हो, तो उसे वापस पाना मुश्किल हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ मिनट सबसे अहम होते हैं।
मोबाइल आधारित ठगी रोकने में मदद कर रही दूसरी पहल
जहां मोबाइल रेस्टोरेशन मॉड्यूल ठगी के बाद फंसी रकम वापस दिलाने पर केंद्रित है, वहीं सरकार की दूसरी पहल संचार साथी मोबाइल और सिम आधारित धोखाधड़ी को रोकने का काम कर रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से फर्जी सिम कार्ड, चोरी हुए मोबाइल फोन और संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों की पहचान की जाती है। लोगों की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से इसका मोबाइल ऐप भी शुरू किया गया था।
साइबर सुरक्षा पर बढ़ा सरकारी फोकस
साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार साइबर सुरक्षा ढांचे को भी मजबूत कर रही है। इसी क्रम में राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी के बजट में लगातार वृद्धि की गई है। बीते वर्षों में साइबर सुरक्षा, निगरानी तंत्र, सुरक्षा अलर्ट, डिजिटल अवसंरचना की रक्षा और साइबर घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई के लिए करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया गया है। सरकार का मानना है कि मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था और नई डिजिटल पहलें ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।