तेरहवीं के अगले दिन जिंदा लौट आया बेटा! अंतिम संस्कार के बाद घर पहुंचा युवक, अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा रहस्य
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने परिवार, पड़ोसियों और पुलिस सभी को हैरान कर दिया। जिस युवक को मृत मानकर परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया था और तेरहवीं तक की रस्में पूरी कर ली थीं, वह अचानक जिंदा घर लौट आया। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया था, वह किस व्यक्ति का था।
गुरुवार को कौशांबी थाना क्षेत्र के वैशाली स्थित एक आवासीय सोसायटी में उस समय सभी लोग स्तब्ध रह गए, जब गिरधर सिंह बिष्ट अचानक अपने घर पहुंच गया। परिजनों ने 14 जून को उसका अंतिम संस्कार किया था और 24 जून को तेरहवीं की रस्म भी पूरी कर ली थी। इसके ठीक अगले दिन युवक के जिंदा लौटने से मातम का माहौल खुशी और हैरानी में बदल गया।
11 दिन पहले मृत घोषित कर किया गया था अंतिम संस्कार
मामले के अनुसार, वैशाली सेक्टर-5 स्थित कल्पना अपार्टमेंट निवासी गिरधर सिंह बिष्ट को इसी वर्ष 17 मई को मारपीट के एक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। 21 मई को अदालत से रिहाई का आदेश मिलने के बाद वह जेल से बाहर आ गया, लेकिन घर नहीं पहुंचा। इसके बाद परिजनों ने उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
गिरधर के लापता होने के बाद परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे और उसकी तलाश की मांग को लेकर विरोध भी किया था।
अज्ञात शव को समझ लिया था गिरधर
12 जून को मसूरी क्षेत्र के नाहल झाल में एक अज्ञात शव बरामद हुआ था। शव का चेहरा बुरी तरह फूल चुका था, जिससे उसकी पहचान करना मुश्किल था। परिजनों ने कपड़ों और शरीर पर मौजूद पुराने निशानों के आधार पर शव की पहचान गिरधर के रूप में कर दी। इसके बाद पुलिस की प्रक्रिया पूरी होने पर 14 जून को अंतिम संस्कार कर दिया गया।
परिवार ने 24 जून को तेरहवीं की रस्म भी संपन्न कर ली थी। लेकिन अगले ही दिन सुबह करीब नौ बजे गिरधर ऑटो रिक्शा से अपने घर पहुंच गया।
घर में अपनी तस्वीर पर माला देखकर भड़क उठा युवक
सोसायटी में गिरधर को देखते ही लोगों के होश उड़ गए। घर पहुंचने पर उसने अपनी तस्वीर पर चढ़ी पुष्पमाला देखी तो नाराज हो गया। परिवार के सदस्य उसे जिंदा देखकर भावुक हो उठे। उसकी मां उससे लिपटकर रोने लगी, जबकि आसपास के लोग इस घटनाक्रम को देखकर अवाक रह गए।
पंजाब के आश्रम में बिताए 13 दिन
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और युवक से पूछताछ की। गिरधर ने बताया कि जेल से रिहा होने के बाद वह लोगों से पैसे मांगकर पंजाब चला गया था। वहां वह डेरा सच्चा सौदा के एक आश्रम में रह रहा था। इसी कारण वह इतने दिनों तक परिवार के संपर्क में नहीं था।
हत्या के आरोप में दर्ज हुई थी एफआईआर
गिरधर के गायब होने और बाद में मिले शव की पहचान के आधार पर उसकी मां ने सात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था। आरोपियों में स्थानीय व्यवसायी और अन्य लोग शामिल थे। अब जबकि गिरधर जीवित मिल गया है, मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
आरोपित पक्ष का कहना है कि उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस अब पूरे मामले की दोबारा जांच कर रही है।
पुलिस के सामने खड़े हुए कई बड़े सवाल
युवक के जिंदा लौट आने के बाद जांच एजेंसियों के सामने कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल उस अज्ञात शव की पहचान को लेकर है, जिसका अंतिम संस्कार गिरधर समझकर कर दिया गया था। साथ ही यह भी जांच का विषय बन गया है कि पहचान की प्रक्रिया में आखिर कहां चूक हुई।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मृतक वास्तव में कौन था और उसके परिजनों तक सूचना कैसे पहुंचाई जाए। इसके अलावा झूठी पहचान, हत्या के मुकदमे और कानूनी जिम्मेदारियों को लेकर भी आगे की कार्रवाई की जा रही है।
अज्ञात शव की पहचान बना सबसे बड़ा रहस्य
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब जांच का केंद्र उस शव की वास्तविक पहचान बन गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।