नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की संभावित स्वदेश वापसी को लेकर जारी चर्चाओं के बीच भारत सरकार ने अपना आधिकारिक रुख दोहराया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और प्रत्यर्पण से जुड़े किसी भी अनुरोध पर कानून तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही निर्णय लिया जाएगा।
शेख हसीना ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा था कि वह बांग्लादेश लौटकर अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है।
विदेश मंत्रालय ने दोहराया अपना रुख
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि शेख हसीना के मामले में भारत के दृष्टिकोण में कोई परिवर्तन नहीं आया है।
उन्होंने कहा कि प्रत्यर्पण से संबंधित कोई भी मामला पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का विषय होता है और ऐसे मामलों का निपटारा कानून एवं स्थापित नियमों के अनुरूप ही किया जाएगा।
बांग्लादेश पहले भी कर चुका है प्रत्यर्पण की मांग
बांग्लादेश की ओर से पहले भी कई बार भारत से शेख हसीना को वापस भेजने की मांग की जा चुकी है। इस वर्ष नई सरकार के गठन के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने भारत दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर के समक्ष भी यह मुद्दा उठाया था। हालांकि भारत ने उस समय भी अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया था।
2024 से भारत में रह रही हैं शेख हसीना
जुलाई-अगस्त 2024 में बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के दौरान हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद वह भारत आ गई थीं और तब से यहीं रह रही हैं।
बांग्लादेश की एक ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में प्रदर्शनकारियों पर कथित हिंसक कार्रवाई का आदेश देने के मामले में उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। इसके अलावा अन्य मामलों में भी उन्हें अलग-अलग अवधि की सजा दी जा चुकी है। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि उन्हें लौटकर न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना चाहिए।
स्वदेश लौटने का किया ऐलान
हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में शेख हसीना ने कहा कि वह हर हाल में बांग्लादेश लौटेंगी और अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगी। उन्होंने बताया कि वह और उनकी पार्टी आवामी लीग के कई नेता दिसंबर के आसपास स्वदेश लौटने की योजना बना रहे हैं।
शेख हसीना ने यह भी कहा कि उन्हें लौटते ही गिरफ्तार किया जा सकता है और उनकी जान को भी खतरा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने देश वापस जाना चाहती हैं। उनके अनुसार, यदि मृत्यु भी हो तो वह अपनी मातृभूमि में ही हो, जहां उनके माता-पिता की समाधि है।