Iran-US Tensions: ईरान ने अमेरिका से बातचीत से किया इनकार, बोला- अभी पूरी प्राथमिकता देश की सुरक्षा और रक्षा
तेहरान: ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी स्तर की बातचीत दोबारा शुरू करने की उसकी कोई योजना नहीं है। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा समय में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता देश की सुरक्षा और रक्षा सुनिश्चित करना है। यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
बातचीत की फिलहाल कोई योजना नहीं
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगई ने कहा कि जब तक अमेरिका 17 जून को हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करता, तब तक ईरान वार्ता की मेज पर वापस नहीं लौटेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में देश का पूरा ध्यान राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा पर केंद्रित है।
यह बयान अमेरिका के उस दावे के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि उसके सैन्य अभियान ईरान को दोबारा बातचीत के लिए मजबूर कर सकते हैं।
अमेरिका पर समझौता तोड़ने का आरोप
ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने समझौते की शुरुआत से ही अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, किसी भी समझौते का आधार दोनों पक्षों की पारस्परिक प्रतिबद्धताएं होती हैं और यदि एक पक्ष उसका उल्लंघन करता है तो दूसरा पक्ष भी उन शर्तों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं रहता।
ईरान का कहना है कि इसी आधार पर उसने भी अपनी जिम्मेदारियों पर पुनर्विचार करने का फैसला किया है।
होर्मुज को लेकर भी सख्त रुख
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा। उसका कहना है कि सैन्य दबाव के जरिए इस क्षेत्र में अपनी रणनीति बदलने का कोई सवाल नहीं है।
सैन्य कार्रवाई पर दी कड़ी चेतावनी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यदि ईरान पर किसी प्रकार का सैन्य हमला किया गया तो उसकी सशस्त्र सेनाएं पूरी ताकत के साथ जवाब देंगी। उन्होंने दावा किया कि देश के भीतर बाहरी दबाव का सामना करने के लिए व्यापक जनसमर्थन मौजूद है।
तनाव के बीच बढ़ी चिंता
हाल के दिनों में अमेरिका द्वारा ईरान के तटीय क्षेत्रों और समुद्री परिसंपत्तियों पर सैन्य अभियान चलाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनसे होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। वहीं, ईरान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने रुख पर कायम रहने की बात दोहराई है।