राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा खुलासा! एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय, अनिल मिश्रा समेत कई जिम्मेदारियों पर उठेगा पर्दा

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लखनऊ: अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट जल्द शासन को सौंपी जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में केवल चोरी की घटना ही नहीं बल्कि उससे जुड़ी व्यवस्थागत लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। माना जा रहा है कि इस बार रिपोर्ट में ट्रस्ट से जुड़े कई प्रमुख नामों की भूमिका का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट शनिवार तक शासन को सौंप सकती है। रिपोर्ट में नए तथ्य सामने आने की संभावना कम है, लेकिन चढ़ावा चोरी रोकने में नाकाम रहे लोगों की जिम्मेदारी तय किए जाने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार, तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि की भूमिकाओं की भी जांच की गई है।

प्रारंभिक जांच में चोरी का तरीका हो चुका है स्पष्ट

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर यह सामने आया था कि अविनाश शुक्ला और मनीष यादव गणना कक्ष से नोटों की गड्डियां चोरी करते थे, जबकि अन्य लोग उनकी मदद करते थे। जांच में यह भी पाया गया कि दानपात्रों की चाबियां रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास रहती थीं, जबकि उन्हें न तो ट्रस्ट और न ही बैंक की ओर से इसके लिए अधिकृत किया गया था।

जांच में यह भी सामने आया कि गणना कार्य के प्रभारी रहे सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर सके, जिससे व्यवस्था में गंभीर चूक सामने आई।

व्यवस्थागत कमियों पर भी रहा एसआईटी का फोकस

एसआईटी ने दो बार अयोध्या पहुंचकर मंदिर ट्रस्ट, बैंक और गणना व्यवस्था से जुड़े रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं की विस्तृत जांच की। टीम ने उन कमियों की पहचान की, जिनके कारण चढ़ावा चोरी की घटना संभव हो सकी। अंतिम रिपोर्ट में चोरी के साथ-साथ सुरक्षा और वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थागत खामियों का भी उल्लेख किए जाने की संभावना है।

हाल ही में हिन्दू धर्मसेना के अध्यक्ष संतोष दुबे से भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूछताछ की गई। एसआईटी ने उनसे लगाए गए आरोपों के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य भी मांगे हैं। बताया जा रहा है कि जांच दल उनके बयान और उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों का भी विश्लेषण करेगा। यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो इसका उल्लेख भी अंतिम रिपोर्ट में किया जा सकता है।

अनिल मिश्रा और बैंक की भूमिका पर भी रहेगी नजर

सूत्रों के अनुसार, विस्तृत रिपोर्ट में ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और बैंक की भूमिका को और स्पष्ट किया जा सकता है। गणना प्रक्रिया से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया पर डॉ. अनिल मिश्रा और बैंक के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक योगेंद्र मिश्रा के हस्ताक्षर बताए गए हैं।

वहीं, ट्रस्ट की 6 जुलाई की बैठक के बाद पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उन्हें इस मानक संचालन प्रक्रिया की जानकारी 13 जून 2026 को तब मिली, जब चोरी का मामला सामने आ चुका था। उन्होंने यह भी कहा था कि इस दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं, जबकि ट्रस्ट के अन्य महत्वपूर्ण अनुबंधों पर उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं। उन्होंने यह सवाल भी उठाया था कि इस प्रक्रिया को लागू करने में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई।

कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारियों का भी किया गया परीक्षण

एसआईटी ने जांच के दौरान ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि की जिम्मेदारियों का भी परीक्षण किया। ट्रस्ट के उपनियमों के आधार पर वित्तीय प्रबंधन और कोष संबंधी प्रक्रियाओं की समीक्षा की गई। हालांकि, स्वामी गोविंददेव गिरि पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि कोष में धन जमा होने से पहले की राशि की जिम्मेदारी उनकी नहीं होती। उनका कहना है कि कोष में जमा होने के बाद धन पूरी तरह सुरक्षित रहा और उसका उपयोग नियमानुसार किया गया।

सूत्रों के अनुसार, जांच दल ने वित्तीय प्रबंधन से जुड़े अभिलेखों का भी सत्यापन किया है। अंतिम रिपोर्ट में कोषाध्यक्ष की भूमिका का कितना और किस रूप में उल्लेख किया गया है, यह रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

 

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