जबरन धर्मांतरण पर अब उम्रकैद तक की सजा! छत्तीसगढ़ में नया कानून लागू, शादी भी हो सकती है रद्द; जानिए पूरे नियम

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में जबरन या धोखाधड़ी से धर्मांतरण के मामलों पर अब और सख्त कार्रवाई होगी। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 को प्रभावी कर दिया है। इसकी अधिसूचना राजपत्र में जारी होने के साथ ही कानून लागू हो चुका है। नए प्रावधानों के तहत बल, प्रलोभन, लालच, धोखाधड़ी या अन्य अनुचित तरीकों से कराए गए धर्मांतरण पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है। साथ ही धर्मांतरण के उद्देश्य से किए गए विवाह को भी शून्य घोषित किया जा सकेगा।

उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नए कानून के लागू होने के बाद धर्मांतरण से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना और अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाना है।

कब लागू हुआ नया कानून?
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 19 मार्च 2026 को विधानसभा से पारित हुआ था। इसके बाद 8 अप्रैल 2026 को राज्यपाल रमेन डेका ने इसे मंजूरी दी। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह कानून 10 जुलाई 2026 से पूरे राज्य में लागू हो गया है। इसके साथ ही अविभाजित मध्य प्रदेश के समय लागू छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 का स्थान इस नए कानून ने ले लिया है।

धर्मांतरण कराने से पहले अपनानी होगी यह प्रक्रिया
नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे पहले अधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन देना होगा। इसके बाद आवेदन की जानकारी संबंधित वेबसाइट, ग्राम पंचायत और स्थानीय थाने में सार्वजनिक की जाएगी।

इसके बाद 30 दिनों तक दावा-आपत्ति और जांच की प्रक्रिया चलेगी। यदि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी 90 दिनों के भीतर धर्मांतरण नहीं होता है, तो आवेदन स्वतः निरस्त माना जाएगा।

किस मामले में कितनी सजा?
नए कानून में अलग-अलग परिस्थितियों के लिए अलग दंड का प्रावधान किया गया है।

सामान्य मामलों में यदि बल, प्रलोभन, लालच या धोखाधड़ी के जरिए धर्मांतरण कराया जाता है तो दोषी को 7 से 10 वर्ष तक की सजा और न्यूनतम 5 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है।

यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 वर्ष तक की हो सकती है। ऐसे मामलों में न्यूनतम 10 लाख रुपये जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।

सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सबसे कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में दोषी को 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है।

धर्मांतरण के उद्देश्य से हुई शादी पर भी असर
कानून के अनुसार यदि किसी विवाह का उद्देश्य धर्मांतरण कराना पाया जाता है, तो सक्षम न्यायालय उस विवाह को शून्य घोषित कर सकता है। यह प्रावधान ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई को और मजबूत बनाता है।

किन राज्यों में पहले से लागू हैं ऐसे कानून?
देश में धर्मांतरण विरोधी कोई केंद्रीय कानून नहीं है। हालांकि छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इस प्रकार के कानून पहले से लागू हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने नए अधिनियम को तैयार करने से पहले इन राज्यों के प्रावधानों का भी अध्ययन किया है।

 

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