भारत की अंतरिक्ष उड़ान में नया इतिहास! आज लॉन्च होगा पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’, जानिए कब, कहां और कैसे देखें LIVE
श्रीहरिकोटा: भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए 18 जुलाई 2026 का दिन ऐतिहासिक बनने जा रहा है। देश की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस अपने पहले स्वदेशी ऑर्बिटल श्रेणी के रॉकेट ‘विक्रम-1’ की पहली टेस्ट फ्लाइट करने जा रही है। ‘मिशन आगमन’ नाम से होने वाला यह प्रक्षेपण भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक बड़े मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है। पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया ऑर्बिटल रॉकेट भारतीय धरती से अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरेगा।
रॉकेट के साथ कई तकनीकी पेलोड भी अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ से लिखा विशेष संदेश भी इस मिशन का हिस्सा होगा, जिसे करीब 450 किलोमीटर ऊंची कक्षा तक पहुंचाया जाएगा।
आज सुबह 11:30 बजे होगी ऐतिहासिक लॉन्चिंग
विक्रम-1 रॉकेट की पहली टेस्ट फ्लाइट शनिवार सुबह 11:30 बजे निर्धारित है। लगभग सात मंजिला ऊंचा यह रॉकेट आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम लॉन्च पैड से उड़ान भरेगा। इस मिशन के जरिए स्काईरूट एयरोस्पेस अपनी स्वदेशी ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता का प्रदर्शन करेगी।
घर बैठे ऐसे देखें लाइव लॉन्च
भारत के इस ऐतिहासिक पल को लोग घर बैठे भी देख सकेंगे। स्काईरूट एयरोस्पेस अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर लॉन्चिंग का सीधा प्रसारण करेगी। कंपनी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच के माध्यम से जानकारी दी है कि दर्शक निर्धारित समय पर लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए इस ऐतिहासिक मिशन का साक्षी बन सकते हैं।
अंतरिक्ष तक पहुंचेगा प्रधानमंत्री का विशेष संदेश
इस मिशन की एक खास बात यह भी है कि विक्रम-1 अपने साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ से लिखा एक विशेष पोस्टकार्ड लेकर जाएगा। स्काईरूट एयरोस्पेस के अनुसार, इस पोस्टकार्ड पर ‘वंदे मातरम्’ लिखा गया है और उस पर प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। पोस्टकार्ड पर 26 जून 2026 की तारीख अंकित है।
350 किलोग्राम तक के उपग्रह पहुंचाने में सक्षम
विक्रम-1 का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। इससे पहले नवंबर 2022 में कंपनी ने विक्रम-एस सबऑर्बिटल रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया था। हालांकि विक्रम-1 उससे एक कदम आगे बढ़कर पूर्ण ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है, जो उपग्रहों को निर्धारित कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है।
मिशन के तहत रॉकेट का लक्ष्य 60 डिग्री झुकाव पर लगभग 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट तक पहुंचना है। इसे विशेष रूप से 350 किलोग्राम तक के छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष की निचली कक्षा में स्थापित करने के लिए विकसित किया गया है। बहु-चरणीय इस रॉकेट का निर्माण कार्बन मिश्रित संरचना से किया गया है। इसमें कंपनी का स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम, 3डी प्रिंटेड इंजन और उच्च क्षमता वाले सॉलिड फ्यूल रॉकेट बूस्टर लगाए गए हैं।
तकनीकी प्रदर्शन पर रहेगा मिशन का फोकस
स्काईरूट एयरोस्पेस के अनुसार, यह उड़ान एक तकनीकी प्रदर्शन मिशन है। इसका उद्देश्य वास्तविक उड़ान परिस्थितियों में रॉकेट की तकनीक, ऑनबोर्ड सिस्टम और विभिन्न प्रणालियों के प्रदर्शन का परीक्षण करना है। इस मिशन से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग भविष्य में तकनीक को और बेहतर बनाने तथा नियमित लॉन्च संचालन की दिशा में किया जाएगा।
इस मिशन में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कंपनियों के कई तकनीकी प्रदर्शन पेलोड भी शामिल हैं, जो देश में निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और क्षमता को दर्शाते हैं।