मानसून सत्र में ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ बिल पर ब्रेक! सरकार का पूरा फोकस महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर

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नई दिल्ली: संसद के सोमवार से शुरू होने वाले मानसून सत्र में ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ विधेयक पेश किए जाने की संभावना नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार फिलहाल इस विधेयक को लेकर जल्दबाजी के पक्ष में नहीं है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था का लक्ष्य वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा है, इसलिए इस पर पर्याप्त समय उपलब्ध है। मौजूदा समय में सरकार की प्राथमिकता महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को आगे बढ़ाने पर है।

सूत्रों के अनुसार, परिसीमन विधेयक इस सत्र में पेश होगा या नहीं, इसे लेकर अगले एक-दो दिनों में स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

मानसून सत्र की रणनीति पर हुई मंत्रियों की बैठक

मानसून सत्र की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों के समूह की बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, शिवराज सिंह चौहान, किरण रिजिजू, जनता दल (यूनाइटेड) के नेता ललन सिंह, तेलुगु देशम पार्टी के नेता राम मोहन नायडू और राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी भी शामिल हुए।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार का आकलन है कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर विपक्ष के कई दल भी समर्थन कर सकते हैं। ऐसे में इन विधेयकों पर कांग्रेस राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ सकती है।

विपक्ष ने भी शुरू की मानसून सत्र की तैयारी

दूसरी ओर, विपक्षी दल भी मानसून सत्र को लेकर अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। द्रविड़ मुनेत्र कषगम के अध्यक्ष एम. के. स्टालिन इन दिनों लंदन दौरे पर हैं। उन्होंने वहीं से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर आगामी रणनीति पर चर्चा की।

बैठक के बाद पार्टी नेताओं ने कहा कि यदि परिसीमन विधेयक मौजूदा स्वरूप में संसद में लाया जाता है तो उसका विरोध किया जाएगा। उनका कहना है कि मौजूदा प्रारूप तमिलनाडु सहित दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों के खिलाफ है।

दक्षिण भारत की पार्टियों ने जताई आपत्ति

दक्षिण भारत के कई राजनीतिक दल परिसीमन विधेयक को लेकर पहले से ही अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। उनका तर्क है कि मौजूदा प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों पर असर पड़ सकता है।

तमिलनाडु की शिवगंगा लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद कार्ती चिदंबरम ने भी कहा कि परिसीमन से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक असंतुलन बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में 543 सदस्यों वाली लोकसभा में भी सीमित सांसदों को ही बोलने का अवसर मिल पाता है। यदि भविष्य में सदस्यों की संख्या बढ़कर लगभग 850 हो जाती है, तो बड़ी संख्या में सांसदों की भूमिका सीमित होकर रह सकती है।

महिला आरक्षण और परिसीमन पर रहेगी नजर

मानसून सत्र के दौरान सरकार की प्राथमिकता महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर रहने की संभावना है। वहीं विपक्ष भी इन मुद्दों पर अपनी रणनीति के साथ सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में संसद का आगामी सत्र इन दोनों विषयों को लेकर राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

 

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