लिवर की बीमारी बिना लक्षण भी बढ़ सकती है, समय रहते करा लें ये 5 जरूरी जांच, गंभीर खतरे से मिल सकती है राहत
नई दिल्ली: लिवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जो भोजन पचाने, विषैले तत्वों को बाहर निकालने, ऊर्जा संग्रहित करने और कई जरूरी प्रोटीन बनाने का काम करता है। लेकिन कई बार लिवर से जुड़ी बीमारियां शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती रहती हैं। ऐसे में केवल लक्षणों का इंतजार करने के बजाय समय-समय पर जांच कराना गंभीर समस्याओं का समय रहते पता लगाने में मदद कर सकता है।
लिवर फंक्शन टेस्ट से मिलती है शुरुआती जानकारी
लिवर की स्थिति जानने के लिए लिवर फंक्शन टेस्ट सबसे महत्वपूर्ण जांचों में माना जाता है। इसमें एसजीओटी, एसजीपीटी, बिलीरुबिन और अन्य जरूरी मानकों की जांच की जाती है। इन रिपोर्टों के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि लिवर सामान्य रूप से काम कर रहा है या नहीं। फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और अन्य लिवर संबंधी समस्याओं के शुरुआती संकेत भी इससे मिल सकते हैं।
हेपेटाइटिस बी और सी की जांच भी है जरूरी
हेपेटाइटिस बी और सी के वायरस लंबे समय तक शरीर में बिना लक्षण के मौजूद रह सकते हैं और धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। समय पर इनकी पहचान होने से इलाज शुरू किया जा सकता है और आगे चलकर गंभीर जटिलताओं की आशंका को कम किया जा सकता है।
फैटी लिवर की समय पर स्क्रीनिंग से मिल सकता है फायदा
बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान, मोटापा, मधुमेह और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण फैटी लिवर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ब्लड टेस्ट और जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड जैसी जांच के माध्यम से इसकी पहचान की जा सकती है।
ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल पर भी रखें नजर
कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर का असंतुलन भी लिवर की सेहत को प्रभावित कर सकता है। यदि इनका स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहता है तो फैटी लिवर और अन्य चयापचय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए इन जांचों को भी नियमित स्वास्थ्य परीक्षण का हिस्सा बनाना उपयोगी माना जाता है।
फाइब्रोसिस की जांच से पता चलता है लिवर को स्थायी नुकसान
जिन लोगों को लंबे समय से फैटी लिवर, हेपेटाइटिस या अत्यधिक शराब सेवन का इतिहास रहा है, उन्हें चिकित्सक आवश्यकता के अनुसार फाइब्रोसिस की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इस जांच के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि लिवर में स्थायी क्षति या फाइब्रोसिस विकसित तो नहीं हो रही है।
स्वस्थ जीवनशैली भी है लिवर की सुरक्षा का आधार
विशेषज्ञों के अनुसार लिवर को स्वस्थ रखने के लिए केवल जांच कराना ही पर्याप्त नहीं है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रित रखना, शराब से परहेज या सीमित सेवन और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाइयों का उपयोग न करना भी लिवर की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।