हर पैर दर्द को न करें नजरअंदाज! जानिए कब तुरंत दिखाएं हार्ट डॉक्टर और किन लक्षणों में जरूरी है स्पाइन एक्सपर्ट की सलाह

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नई दिल्ली: पैरों में दर्द होना आम बात मानी जाती है और अक्सर लोग इसे थकान या मांसपेशियों में खिंचाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार यही दर्द रीढ़ की हड्डी या हृदय से जुड़ी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार दर्द की प्रकृति और उसके साथ दिखाई देने वाले अन्य लक्षणों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते सही इलाज शुरू किया जा सके।

इन लक्षणों में तुरंत लें स्पाइन एक्सपर्ट की सलाह

विशेषज्ञों के अनुसार यदि दर्द कमर से शुरू होकर कूल्हे, जांघ और पैर तक बिजली के झटके जैसा महसूस हो, साथ में सुन्नपन, झुनझुनी, पैर में कमजोरी या लंबे समय तक खड़े रहने और चलने में परेशानी हो, तो यह रीढ़ की हड्डी या नसों से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में स्लिप डिस्क, स्पाइनल स्टेनोसिस या नस दबने जैसी स्थितियों की आशंका रहती है।

यदि दर्द के साथ पैर उठाने में कठिनाई, बार-बार ठोकर लगना या पेशाब और मल पर नियंत्रण में बदलाव जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो बिना देरी किए स्पाइन विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।

एमआरआई जांच से चल सकता है दर्द का सही कारण

ऐसे मामलों में डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार एमआरआई जांच की सलाह दे सकते हैं। इस जांच के जरिए रीढ़ की हड्डी, इंटरवर्टिब्रल डिस्क, नसों और स्पाइनल कैनाल की स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाता है। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि दर्द का कारण स्लिप डिस्क, नस पर दबाव, स्पाइनल स्टेनोसिस, संक्रमण या कोई अन्य समस्या है। समय पर जांच होने से कई मामलों में दवाओं, फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में बदलाव के जरिए स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है और सर्जरी की जरूरत भी टल सकती है।

इन संकेतों को हल्के में न लें, हार्ट स्पेशलिस्ट से कराएं जांच

यदि चलते समय पिंडली या जांघ में दर्द होता है और आराम करने पर दर्द कम हो जाता है, पैर सामान्य से अधिक ठंडा महसूस होता है, त्वचा का रंग बदलने लगता है, नाड़ी कमजोर महसूस होती है या पैरों के घाव देर से भरते हैं, तो यह रक्त संचार में रुकावट का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में हृदय रोग विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी माना जाता है, क्योंकि यह हृदय रोग या स्ट्रोक के बढ़े हुए जोखिम की ओर भी इशारा कर सकता है।

इन लक्षणों के साथ तुरंत पहुंचें अस्पताल

यदि पैरों के दर्द के साथ सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, अचानक कमजोरी, चक्कर आना या बेहोशी जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए तुरंत अस्पताल जाकर चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है।

 

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