गौतमबुद्धनगर में बाढ़ से निपटने की तैयारी तेज, डीएम ने दिए सख्त निर्देश; गांवों की सूची से लेकर नाव-गोताखोर तक रहेंगे तैयार

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गौतमबुद्धनगर: संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में बाढ़ से पहले की जाने वाली तैयारियों की समीक्षा बैठक हुई। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ सभी तैयारियां निर्धारित समय-सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए, ताकि बाढ़ की स्थिति में आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

यमुना-हिंडन का जलस्तर सामान्य, बांधों और कटान स्थलों की होगी निगरानी

बैठक में सिंचाई विभाग ने बताया कि फिलहाल यमुना और हिंडन नदियों का जलस्तर सामान्य है। जिलाधिकारी ने कटान वाले स्थानों का नियमित निरीक्षण करने और वहां चल रहे कार्यों की प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने सभी बांधों का नियमित निरीक्षण करने के साथ रेनकट और रैटहोल वाले स्थानों को चिह्नित कर समय से मरम्मत कराने को कहा। बाढ़ से बचाव के लिए बालू भरी बोरियां, जियो बैग्स, अन्य आवश्यक सामग्री और पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने बाढ़ योजना-2026 तैयार कर उसकी हार्ड कॉपी सभी संबंधित विभागों को उपलब्ध कराने को भी कहा।

बाढ़ प्रभावित गांवों और परिवारों की पहले से तैयार होगी सूची

राजस्व विभाग को सभी उप जिलाधिकारियों और तहसीलदारों के माध्यम से कंट्रोल रूम स्थापित कर शिफ्टवार ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए गए। कंट्रोल रूम के दूरभाष नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार भी कराया जाएगा।

जिलाधिकारी ने संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की डायरेक्टरी तैयार करने को कहा, जिसमें मोबाइल नंबर सहित जरूरी विवरण दर्ज होगा। प्रभावित होने वाले गांवों और परिवारों की सूची पहले से तैयार की जाएगी। बीमार, असक्त और पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों की अलग सूची बनाने के निर्देश दिए गए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सहायता दी जा सके।

खाद्यान्न, बाढ़ राहत सामग्री, डिग्निटी किट और पके भोजन की व्यवस्था के लिए समय से निविदा प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया। किसी भी संसाधन की कमी होने पर तत्काल मांग पत्र के माध्यम से उसकी मांग भेजने के निर्देश दिए गए।

बाढ़ चौकियों पर दवाएं और पैरामेडिकल स्टाफ रहेगा तैनात

स्वास्थ्य विभाग को बाढ़ के दौरान होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए पर्याप्त दवाओं का भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बाढ़ के दौरान ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों की सूची भी तैयार की जाएगी।

बाढ़ के दौरान और उसके बाद होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए बाढ़ चौकियों पर जरूरी दवाओं के साथ पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया।

मुख्य और वैकल्पिक मार्गों की मरम्मत के निर्देश

लोक निर्माण विभाग को संभावित बाढ़ के दौरान बंद होने वाले मुख्य मार्गों के साथ वैकल्पिक रास्तों की मरम्मत समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए। राहत केंद्रों और शरणालयों से प्रभावित क्षेत्रों के बीच संपर्क मार्गों की मरम्मत और पुनर्स्थापना भी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे राहत और बचाव अभियान में बाधा न आए।

राहत केंद्रों पर सफाई और पेयजल व्यवस्था रहेगी दुरुस्त

पंचायती राज विभाग को बाढ़ राहत केंद्रों, बाढ़ चौकियों और संभावित प्रभावित गांवों में साफ-सफाई, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं को मजबूत रखने के निर्देश दिए गए।

पशु चिकित्सा विभाग को संभावित बाढ़ प्रभावित गौशालाओं की पहले से पहचान करने को कहा गया। जरूरत पड़ने पर पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए स्थानों का चयन पहले से किया जाएगा। पशुओं के लिए पर्याप्त भूसा और हरे चारे की व्यवस्था के साथ स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार के लिए मेडिकल टीम गठित करने के निर्देश भी दिए गए।

जलभराव वाले इलाकों की नियमित निगरानी करेंगे प्राधिकरण और नगर निकाय

जिलाधिकारी ने विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में जलभराव की नियमित निगरानी करने को कहा। जल बहाव या जलभराव की समस्या सामने आने पर तत्काल उसका निस्तारण कराया जाएगा।

संबंधित मामलों में धारा-10 का नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई करने और अब तक जारी किए गए धारा-10 के नोटिसों की रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। विकास प्राधिकरणों और नगर निकायों को सफाई व्यवस्था तथा नालों के जरिए जल निकासी को दुरुस्त रखने को कहा गया।

आवश्यक पंपिंग सेटों को पहले से चिन्हित कर उनकी सूची जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। प्राधिकरण क्षेत्रों में बिजली, पानी और जलभराव समेत आम लोगों की समस्याओं के समयबद्ध समाधान के लिए संबंधित प्राधिकरणों को अपना “मित्रा ऐप” सक्रिय रखने को कहा गया। इसके माध्यम से लोग अपनी समस्याएं संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकेंगे। प्राधिकरणों को स्वास्थ्य विभाग के लिए आवश्यक मात्रा में ब्लीचिंग पाउडर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।

नाव, गोताखोर और संचार उपकरण पहले से रहेंगे तैयार

पुलिस विभाग को संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पीएसी बाढ़ वाहिनी की तैनाती, नावों और गोताखोरों की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। नाविकों और गोताखोरों की सूची संबंधित विभागों को उपलब्ध कराई जाएगी।

वायरलेस सेट समेत जरूरी संचार उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और संचार व्यवस्था मजबूत रखने को कहा गया। इसके साथ ही अग्निशमन विभाग के साथ समन्वय कर बाढ़ से निपटने की तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए।

खाद्यान्न, बिजली और पेयजल व्यवस्था पर भी फोकस

आपूर्ति विभाग को बाढ़ की स्थिति में पर्याप्त खाद्यान्न और जरूरी खाद्य पदार्थ उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए। विद्युत विभाग को संभावित प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए आवश्यक तैयारियां करने को कहा गया।

खराब ट्रांसफार्मरों को पहले से चिह्नित कर दुरुस्त कराने, बाढ़ चौकियों पर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा खराब पोल और ढीले तारों को समय से ठीक कराने के निर्देश दिए गए। जल निगम को सभी बाढ़ चौकियों पर हैंडपंपों की मरम्मत कराने और जहां हैंडपंप उपलब्ध नहीं हैं, वहां नए हैंडपंप स्थापित कराने को कहा गया।

डीएम ने कहा- राहत और बचाव के लिए बेहतर समन्वय जरूरी

जिलाधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों को संभावित बाढ़ की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अपने-अपने विभाग से संबंधित सभी तैयारियां निर्धारित समय-सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा के समय त्वरित राहत और बचाव के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय और प्रभावी संचार व्यवस्था बेहद जरूरी है।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी भालचंद्र त्रिपाठी, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अजीत कुमार, एएसपी पुलिस संतोष कुमार, जिला आपदा विशेषज्ञ ओमकार चतुर्वेदी, उप जिलाधिकारीगण सहित सिंचाई, लोक निर्माण, स्वास्थ्य, पशुपालन, आपूर्ति, जल निगम, विकास प्राधिकरणों और नगर निकायों के अधिकारी मौजूद रहे।

 

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