SC में शिवसेना केस पर चल रही थी बहस, बाहर तेज म्यूजिक सुनकर सिब्बल बोले- ‘अब डांस करने का समय आ गया’

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को शिवसेना से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कोर्टरूम के बाहर तेज संगीत बजने से कुछ देर के लिए माहौल हल्का हो गया। संगीत की आवाज सुनकर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मजाकिया अंदाज में कहा कि शायद अब डांस करने का समय आ गया है। उस वक्त भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने शिवसेना मामले की सुनवाई चल रही थी।

तेज संगीत पर सिब्बल ने किया मजाक

कोर्टरूम नंबर एक में सुनवाई के दौरान बाहर से तेज संगीत की आवाज आने लगी। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि लगता है अब डांस करने का समय आ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि बाहर कौन ऐसा कर रहा है। सिब्बल ने मजाकिया अंदाज में कहा कि शायद किसी ने चुनाव जीत लिया है या कुछ ऐसा हुआ है।

सुनवाई के दौरान सिब्बल ने यह भी बताया कि उन्हें दोपहर में मथुरा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक पैदल आना पड़ा, क्योंकि उनकी कार के लिए रास्ते में जगह नहीं थी। उन्होंने बाहर काफी भीड़ होने की बात कही।

जस्टिस बागची ने भी हल्के अंदाज में दिया जवाब

सिब्बल की बात पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने हल्के अंदाज में कहा, ‘बार डेमोक्रेसी फल-फूल रही है।’ इस पर सिब्बल ने जवाब दिया कि हां, बिल्कुल और कम से कम इस अदालत में तो इसमें कोई संदेह नहीं है।

शिवसेना मामले की गंभीर सुनवाई के बीच हुई इन टिप्पणियों से कुछ देर के लिए कोर्टरूम का माहौल सहज हो गया। इसके बाद पीठ ने मामले से जुड़े कानूनी मुद्दों और दलीलों पर सुनवाई जारी रखी।

चुनाव को लेकर CJI को देर रात आए थे फोन

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने भी चुनाव से जुड़ा एक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें देर रात, बल्कि काफी देर रात, एक-दो फोन आए थे। फोन करने वालों की ओर से चुनाव को लेकर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया था।

CJI की इस टिप्पणी पर कपिल सिब्बल ने कहा कि अदालत के सामने पहले से ही ऐसे कई मुद्दे हैं, जो वास्तव में सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से पूरी तरह बाहर हैं। उन्होंने कहा कि अदालत के सामने ऐसे बहुत से मुद्दे हैं, जिनका इस अदालत के अधिकार क्षेत्र से सीधा संबंध नहीं है।

क्या है शिवसेना से जुड़ा मामला?

शिवसेना से जुड़ा यह मामला महाराष्ट्र में 2022 के सत्ता संघर्ष के बाद सामने आए संवैधानिक विवाद से जुड़ा है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के विधायकों के एक बड़े गुट ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर दी थी। इसके बाद भाजपा के समर्थन से एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने।

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद इस बात समेत कई संवैधानिक सवालों पर सुनवाई हुई कि असली शिवसेना किस गुट को माना जाए, बागी विधायकों की अयोग्यता से जुड़े मामलों में क्या प्रक्रिया होनी चाहिए और विधानसभा अध्यक्ष के फैसले की संवैधानिक स्थिति क्या है। सुप्रीम कोर्ट इन्हीं मुद्दों से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर रहा है।

 

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