सज्जन कुमार की मौत पर छलका 1984 दंगा पीड़ित परिवार का दर्द, गंगा कौर बोलीं- फांसी होती तो ज्यादा शांति मिलती

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नई दिल्ली: सज्जन कुमार की मौत पर 1984 के सिख विरोधी दंगों से प्रभावित परिवारों का दर्द सामने आया है। परिवार की सदस्य गंगा कौर ने कहा कि सज्जन कुमार को अगर फांसी की सजा मिलती तो उन्हें ज्यादा शांति मिलती। सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 वर्ष की उम्र में तिहाड़ जेल में निधन हो गया। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

गंगा कौर ने सुनाई उस दौर की आपबीती

गंगा कौर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि 1984 के दंगों के दौरान उनके परिवार के सदस्यों को उनकी आंखों के सामने जिंदा जला दिया गया था। उन्होंने बताया कि उस समय उनकी उम्र करीब 8-9 साल थी। गंगा कौर के मुताबिक, उन्होंने अपनी आंखों से परिवार के 11 सदस्यों को जिंदा जलते देखा था, लेकिन उस वक्त किसी ने उनकी मदद नहीं की।

उन्होंने कहा कि सज्जन कुमार की मौत प्राकृतिक रूप से हुई, जबकि उनके परिवार के लोगों को जिंदा जला दिया गया था। गंगा कौर ने कहा कि अगर सज्जन कुमार को फांसी दी जाती तो उन्हें ज्यादा शांति मिलती।

गंगा कौर बोलीं- दोनों घटनाओं में बहुत फर्क है

गंगा कौर ने कहा कि एक व्यक्ति को जिंदा जलाया गया और दूसरा व्यक्ति प्राकृतिक मौत मर रहा है। उन्होंने कहा कि इन दोनों घटनाओं में बहुत बड़ा अंतर है। इस दौरान वह अपने परिवार के साथ हुई घटना को याद करते हुए भावुक भी हो गईं।

1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़ा था मामला

सज्जन कुमार 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। यह मामला दिल्ली कैंट क्षेत्र में हुई हत्या और आगजनी की घटनाओं से संबंधित था। 1 और 2 नवंबर 1984 को दिल्ली कैंट के राजनगर पार्ट-1 में पांच सिखों की हत्या और राजनगर पार्ट-2 में एक गुरुद्वारे को आग लगाए जाने की घटना इसी मामले का हिस्सा थी।

2013 में ट्रायल कोर्ट ने किया था बरी

इस मामले में वर्ष 2013 में निचली अदालत ने सज्जन कुमार को आरोपों से बरी कर दिया था। इसके बाद इस फैसले के खिलाफ अपील दाखिल की गई। 17 दिसंबर 2018 को दिल्ली हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया और सज्जन कुमार को दोषी ठहराया।

हत्या और आपराधिक साजिश समेत गंभीर आरोपों में दोषी

दिल्ली हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को आपराधिक साजिश रचने और हत्या के लिए उकसाने समेत अन्य गंभीर आरोपों में दोषी माना था। अदालत ने उन्हें प्राकृतिक जीवन के अंत तक जेल में रहने की सजा सुनाई थी।

हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सज्जन कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। उनके निधन के समय यह अपील लंबित थी।

 

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