काठमांडू: नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। पानी, कीचड़ और मलबे के तेज बहाव ने कई बस्तियों और बुनियादी ढांचे को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है। इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 157 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। चीन सीमा से सटे रसुवा जिले के निचले इलाके बिदुर में काम कर रहे 24 वर्षीय नेपाली मजदूर बिबेक कुमाल की जान बेहद नाटकीय तरीके से बची। वह एक नए मकान के बाहर शौचालय का गड्ढा खोद रहे थे, तभी पहाड़ी की ओर से अचानक पानी और मलबे का तेज सैलाब आ गया।
सैलाब में बह गए बिबेक, पेड़ पकड़कर बची जान
बिबेक ने बताया कि ऊपर मौजूद उनके साथियों ने जब उन्हें खतरे के बारे में चिल्लाकर बताया, तब उन्होंने वहां से निकलने की कोशिश की। लेकिन इससे पहले कि वह सुरक्षित जगह तक पहुंच पाते, तेज बहाव उन्हें अपने साथ बहा ले गया। पानी के साथ कीचड़ और पत्थरों में फंसे बिबेक नीचे की ओर खिंचते चले गए। इसी दौरान रास्ते में एक आम का पेड़ आ गया, जिसे उन्होंने पकड़ लिया। वह काफी देर तक पेड़ से चिपके रहे। बाद में पुलिस टीम ने उन्हें वहां से सुरक्षित निकाला और इलाज के लिए काठमांडू के नेशनल ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया। इस हादसे में उनके पैर में चोट लगी है।
‘पानी की लहर ऐसे आई जैसे भूकंप आ गया हो’
अस्पताल में अपने बिस्तर पर लेटे बिबेक कुमाल ने हादसे को याद करते हुए बताया कि वह जान बचाने के लिए भागने लगे थे, तभी पानी की बेहद तेज लहर आई। उनके मुताबिक, ऐसा लगा जैसे भूकंप आ गया हो। उनके भाई दिनेश भी अस्पताल में उनके साथ मौजूद थे। बिबेक ने बताया कि तेज बहाव उन्हें कीचड़ और मलबे के साथ नीचे की ओर बहा ले गया, लेकिन किस्मत से वह आम के पेड़ में अटक गए। उन्होंने कहा कि अगर वह पेड़ नहीं मिलता तो उनकी जान बचना मुश्किल था।
157 लोगों की मौत, सैकड़ों अब भी लापता
नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ को देश की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक बताया जा रहा है। अचानक आए सैलाब में कम से कम 157 लोगों की जान जा चुकी है। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, अब तक 114 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है। घायलों और प्रभावित लोगों को काठमांडू तथा रसुवा के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।
11 साल की बच्ची भी बाढ़ की चपेट में आई
इस आपदा में सिर्फ बिबेक ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में बच्चे और स्थानीय लोग भी प्रभावित हुए हैं। अस्पताल में भर्ती 11 वर्षीय रिहाना लामिछाने ने बताया कि बाढ़ के समय वह स्कूल में थीं। हालात बिगड़ने पर स्कूल बंद कर दिया गया और बच्चों को घर जाने के लिए कहा गया। रिहाना जब नदी पार कर रही थीं, तभी अचानक पानी का बहाव बेहद तेज हो गया। हादसे में उनकी छाती और पैर में चोट आई है। रिहाना ने कहा कि वह सुरक्षित हैं, इसलिए खुश हैं, लेकिन उन्हें अब भी यह पता नहीं है कि उनके दोस्तों के साथ क्या हुआ।