High Courts में 65 लाख से ज्यादा केस लंबित, न्याय के लिए दशकों का इंतजार; 22 साल पुराने मामले ने खींचा ध्यान

0 15

नई दिल्ली: देश की न्याय व्यवस्था में लंबित मामलों का भारी बोझ एक बार फिर सामने आया है। देशभर के उच्च न्यायालयों में 65 लाख से अधिक मामले लंबित बताए जा रहे हैं। इन मामलों के चलते कई लोगों को न्याय के लिए वर्षों, यहां तक कि दशकों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसका एक उदाहरण राजस्थान के जालोर जिले के एक स्वास्थ्यकर्मी का मामला है, जिन्हें 1999 में दैनिक वेतन भोगी के तौर पर नौकरी से हटा दिया गया था।

स्वास्थ्यकर्मी ने इस फैसले के खिलाफ जोधपुर लेबर कोर्ट का रुख किया था। वहां से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने वर्ष 2004 में राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की। लेकिन लंबे समय के बाद भी इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो सकी।

22 साल बाद भी नहीं पूरी हुई सुनवाई

इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि याचिका दायर किए करीब 22 साल गुजरने के बावजूद सुनवाई पूरी नहीं हुई। सुनवाई में हो रही देरी के चलते याचिकाकर्ता को जल्द सुनवाई की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

यह मामला बताता है कि हाईकोर्ट में लंबित मामलों का असर किस तरह आम लोगों की न्याय पाने की प्रक्रिया पर पड़ रहा है। कई मामलों में पक्षकारों को अंतिम फैसले के बजाय सिर्फ सुनवाई की तारीख मिलने का इंतजार करना पड़ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई का रास्ता बताया

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका पर विचार करने का कोई आधार नहीं दिखता। हालांकि, याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई के लिए आवेदन देने की छूट दी गई।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा लंबित मामले

देश के प्रमुख हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या भी न्यायिक व्यवस्था पर बढ़ते दबाव की तस्वीर दिखाती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट में करीब 12.5 लाख मामले लंबित हैं। यहां प्रत्येक जज या पीठ रोजाना औसतन 150 से 200 मामलों की सुनवाई करती है, लेकिन इसके बावजूद लंबित मामलों का बड़ा आंकड़ा बना हुआ है।

राजस्थान हाईकोर्ट में करीब 7 लाख, बॉम्बे हाईकोर्ट में करीब 6.4 लाख और मद्रास हाईकोर्ट में करीब 5.6 लाख मामले लंबित बताए गए हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में करीब 4.9 लाख और कर्नाटक हाईकोर्ट में करीब 3.3 लाख मामले लंबित हैं।

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में करीब 2.5 लाख, कलकत्ता हाईकोर्ट में करीब 1.9 लाख और दिल्ली हाईकोर्ट में करीब 1.2 लाख मामले लंबित बताए गए हैं।

15 लाख से ज्यादा मामले 10 साल से पुराने

देशभर के विभिन्न उच्च न्यायालयों में करीब 15 लाख मामले ऐसे हैं, जो 10 साल से अधिक समय से लंबित हैं। लंबे समय तक मामलों के लंबित रहने से अदालतों पर मुकदमों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

लंबित मामलों की यह स्थिति सिर्फ अदालतों के कामकाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उन लोगों को भी लंबे इंतजार का सामना करना पड़ता है जो अपने विवाद का कानूनी समाधान चाहते हैं।

सुनवाई की तारीख के लिए भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच रहे लोग

मामलों के निपटारे में देरी का एक असर यह भी सामने आ रहा है कि लोग अपने मुकदमे का फैसला पाने के लिए ही नहीं, बल्कि हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई की तारीख हासिल करने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट का रुख कर रहे हैं। इससे शीर्ष अदालत पर भी ऐसे मामलों का अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।

लंबित मामलों का बढ़ता बोझ बड़ी चुनौती

हाईकोर्ट में लाखों मामलों का लंबित होना न्यायिक प्रक्रिया के सामने बड़ी चुनौती है। खासकर वे मामले जो एक दशक या उससे अधिक समय से अदालतों में चल रहे हैं, उनमें पक्षकारों को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का इंतजार करना पड़ रहा है। 22 साल पुराने राजस्थान के मामले ने इसी देरी की गंभीर तस्वीर सामने रखी है।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.