नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा लेखा विभाग की प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी और कुशल बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्तता और एकीकरण पर जोर दिया जा रहा है, उसी भावना को रक्षा लेखा विभाग के वित्तीय तंत्र में भी लागू करने की जरूरत है।
रक्षा मंत्री ने गुरुवार को रक्षा लेखा विभाग के 279वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाएं जब मिलकर काम कर रही हैं, तो उनके वित्तीय तंत्र भी एकीकृत होने चाहिए। इससे पूरी रक्षा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और कुशल बनाया जा सकता है।
राजनाथ सिंह ने रक्षा लेखा विभाग को रक्षा मंत्रालय का ऐसा साझा सूत्र बताया, जिससे मंत्रालय के लगभग सभी काम किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं। उन्होंने विभाग को पूरे रक्षा तंत्र की रीढ़ करार दिया।
2025-26 में करीब 100 प्रतिशत रही व्यय बुकिंग
रक्षा मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में व्यय बुकिंग करीब 100 प्रतिशत रही। उन्होंने इसे रक्षा लेखा विभाग और तीनों सेनाओं के संयुक्त प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता, कड़ी मेहनत और कार्यकुशलता को दर्शाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस वर्ष भी विभाग इसी गति और ऊर्जा के साथ काम को आगे बढ़ाएगा।
उन्होंने कहा कि अब ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जिसमें बजट की शेष राशि की जानकारी केवल वार्षिक समीक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि किसी भी समय वित्तीय स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो सके।
तीन शताब्दियों की विरासत को आगे बढ़ाने पर दिया जोर
राजनाथ सिंह ने रक्षा लेखा विभाग के 279वें स्थापना दिवस पर सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि किसी संस्था के लिए लगभग तीन शताब्दियों तक काम करते रहना गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि रक्षा लेखा विभाग की बड़ी विरासत को अधिकारियों और कर्मचारियों ने न केवल बनाए रखा है, बल्कि उसे आगे बढ़ाने का भी काम किया है। इसके लिए उन्होंने विभाग से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी।
लेखा-परीक्षण में बेहतर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यप्रणालियां अपनाने की सलाह
रक्षा मंत्री ने गुणवत्ता लेखा-परीक्षण के क्षेत्र में देश और दुनिया में उपलब्ध बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध अच्छी कार्यप्रणालियों को आत्मसात कर उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में लागू करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने कहा कि इससे विभाग देश और दुनिया के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ सकेगा। उन्होंने रक्षा लेखा विभाग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल को भी बढ़ाने का सुझाव दिया।
पूर्व सैनिकों की मदद के लिए बातचीत आधारित एआई व्यवस्था का सुझाव
रक्षा मंत्री ने विभाग से ऐसी बातचीत आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता व्यवस्था तैयार करने का प्रयास करने को कहा, जिसमें संपर्क के अलग-अलग माध्यमों को एक साथ जोड़ा जा सके। इसमें बातचीत, लघु संदेश, व्हाट्सऐप, ई-मेल और दूरभाष जैसे माध्यम शामिल किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर इस व्यवस्था को सही तरीके से लागू किया जाता है तो इससे पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है। साथ ही पूरे विभाग की कार्यक्षमता को भी नए स्तर तक ले जाने में मदद मिलेगी।
स्पर्श के आंकड़ों की सफाई के बाद शिकायत समाधान को स्वचालित करने पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा लेखा विभाग ने स्पर्श के आंकड़ों की सफाई के क्षेत्र में पहले ही बड़ी सफलता हासिल की है। अब उन्होंने शिकायतों के समाधान की व्यवस्था को स्वचालित बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का सुझाव दिया। रक्षा मंत्री के मुताबिक, शिकायत समाधान व्यवस्था में स्वचालन से विभाग की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।