आजम खां की जेल से रिहाई में फिर फंसा पेंच, 5 मुकदमों में मिली राहत; 52 केस बने बड़ी बाधा

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रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां की जेल से रिहाई का इंतजार अभी और लंबा हो सकता है। बेटे अब्दुल्ला आजम के दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शुक्रवार को एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में विचाराधीन आजम खां के पांच मुकदमों में रिहाई परवाने जारी कर दिए गए। हालांकि, मजिस्ट्रेट कोर्ट में लंबित मामलों के चलते उनकी रिहाई की प्रक्रिया अटक गई। कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के कारण शुक्रवार को रिहाई के आदेश जारी नहीं हो सके। अब शनिवार तक रिहाई टल गई है। वहीं, अब्दुल्ला आजम के नाम शुक्रवार को एक भी रिहाई परवाना जारी नहीं हुआ।

आजम के खिलाफ 52 और अब्दुल्ला पर 41 मुकदमे लंबित

सेशन कोर्ट से आजम खां के पांच मुकदमों में रिहाई परवाने जारी होने के बावजूद उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में आजम खां के खिलाफ 52 और अब्दुल्ला आजम के खिलाफ 41 मामले विचाराधीन हैं। इन मामलों में भी रिहाई परवाने जारी होने की प्रक्रिया बाकी है। शुक्रवार को कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पाने के कारण मजिस्ट्रेट कोर्ट से परवाने जारी नहीं किए जा सके। इसी वजह से दोनों की जेल से रिहाई फिलहाल अटक गई है।

आजम ने जमा किए 3.50 लाख, अब्दुल्ला ने दिए 2.75 लाख रुपये

दो पैन कार्ड के मामले में हाईकोर्ट से जमानत मंजूर होने के बाद शुक्रवार को आजम खां की ओर से हाईकोर्ट के आदेश की प्रति एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में दाखिल की गई। इसके अनुपालन में आजम खां ने 3.50 लाख रुपये और अब्दुल्ला आजम ने 2.75 लाख रुपये नकद नजारत में जमा कराए।

इसके बाद अदालत ने आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए दोनों के रिहाई परवाने जारी कर दिए। हालांकि, अन्य लंबित मुकदमों में रिहाई से जुड़ी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण जेल से बाहर आने का रास्ता साफ नहीं हो सका।

क्या है दो पैन कार्ड का पूरा मामला?

अब्दुल्ला आजम स्वार विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे। उनके खिलाफ दो पैन कार्ड बनवाने के मामले में भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम और उनके पिता आजम खां ने निजी स्वार्थ के लिए अलग-अलग जन्मतिथि वाले प्रमाणपत्रों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए। इन दोनों कार्डों के जरिए आयकर रिटर्न भी दाखिल किए गए थे।

इस मामले में एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को आजम खां और अब्दुल्ला आजम को सात-सात साल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ दोनों ने एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की थी।

आजम की सजा सात से बढ़ाकर 10 साल की गई थी

इस मामले में सरकार की ओर से सजा बढ़ाने के लिए भी अपील की गई थी। सुनवाई के बाद एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने आजम खां की सजा सात साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी थी, जबकि अब्दुल्ला आजम की सजा बरकरार रखी गई थी।

सेशन कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए आजम खां और अब्दुल्ला आजम ने हाईकोर्ट का रुख किया था। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को दोनों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली थी।

जमानत के बाद भी पूरी नहीं हुई रिहाई की प्रक्रिया

हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद आजम खां और अब्दुल्ला आजम की ओर से एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट और मजिस्ट्रेट कोर्ट में अलग-अलग मुकदमों में जमानती दाखिल किए गए थे। अदालत ने जमानतियों के सत्यापन के लिए पुलिस और राजस्व प्रशासन को निर्देश दिए थे।

शुक्रवार को सेशन कोर्ट ने आजम खां के पांच विचाराधीन मुकदमों में रिहाई परवाने जारी कर दिए, लेकिन मजिस्ट्रेट कोर्ट में लंबित अन्य मामलों के कारण रिहाई की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। अब दोनों की जेल से रिहाई के लिए बाकी मामलों में भी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होना जरूरी है।

 

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