गौतमबुद्धनगर जेल में बंद 2118 कैदी, 43 युवा बंदियों से सचिव शिवानी रावत ने की मुलाकात; महिला बैरक का भी किया निरीक्षण
गौतमबुद्धनगर: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शिवानी रावत ने 5 नवंबर 2026 को जिला कारागार गौतमबुद्धनगर का मासिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने युवा बंदियों और महिला कैदियों से बातचीत कर उनके मुकदमों, निःशुल्क कानूनी सहायता और जेल में मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली। निरीक्षण के समय उप जेलर सुरजीत सिंह भी मौजूद रहे।
जिला कारागार में 2118 बंदी निरुद्ध
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ और जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष के निर्देश पर यह मासिक निरीक्षण किया गया। जेल प्रशासन की ओर से बताया गया कि जिला कारागार में इस समय कुल 2118 बंदी निरुद्ध हैं। इनमें 18 से 21 वर्ष आयु वर्ग के 43 युवा बंदी भी शामिल हैं।
सचिव शिवानी रावत ने युवा बंदियों की बैरकों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने उनसे उनके मुकदमों की स्थिति और निःशुल्क विधिक सहायता योजना के तहत नियुक्त अधिवक्ता के बारे में जानकारी ली।
महिला बंदियों से भी जानी समस्याएं
निरीक्षण के दौरान सचिव ने महिला बैरक में बंद कैदियों से भी बातचीत की। उन्होंने उनके मुकदमों से जुड़ी स्थिति, जेल में किसी तरह की असुविधा और निःशुल्क कानूनी सहायता मिलने के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
महिला प्रकोष्ठ में नामित महिला पैरालीगल वॉलंटियर (पीएलवी) के रिहा होने के बाद कानूनी सहायता से जुड़े कार्यों को सुचारू बनाए रखने के लिए सचिव ने जेल प्रशासन को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नई महिला बंदियों में से उपयुक्त महिलाओं को पीएलवी के रूप में नामित किया जाए।
बंदियों के बीच से चुने जाते हैं पैरालीगल वॉलंटियर
सचिव शिवानी रावत ने बताया कि जिला कारागार में निरुद्ध शिक्षित बंदियों में से पुरुष और महिला पैरालीगल वॉलंटियर नामित किए जाते हैं। इनका उद्देश्य जेल में बंद कैदियों की समस्याओं और मुकदमों से जुड़ी जानकारी जेल प्रशासन के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तक पहुंचाना है।
इसके बाद सचिव की ओर से संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाते हैं, ताकि पुरुष और महिला बंदियों को उनके हित में निःशुल्क विधिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इस व्यवस्था के जरिए बंदियों को कानूनी सहायता और उनकी समस्याओं के समाधान में मदद मिलती है।