जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई के आदेश पर अखिलेश यादव का हमला, भाजपा से पूछा- ‘अपने लोगों के अवैध भवन कब ढहाएगी?’

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लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को ध्वस्त करने के प्रशासनिक आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने इस कार्रवाई को निंदनीय बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा शिक्षा को भी सांप्रदायिक नजरिए से देखती है।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि शिक्षा, शिक्षक, विद्यार्थी और शिक्षा के बाद मिलने वाली नौकरी भाजपा के एजेंडे में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को शिक्षा में भी सांप्रदायिकता दिखाई देती है।

भाजपा पर साधा निशाना

सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में सवाल उठाते हुए लिखा कि भाजपा अपने अपंजीकृत सहयोगियों के कथित अवैध भवनों पर कार्रवाई कब करेगी। उन्होंने कहा कि जब उनके सहयोगी ही अपंजीकृत हैं, तो उनके भवन, कार्यालय और संस्थानों को वैध कैसे माना जा सकता है। उन्होंने पूरे मामले को निंदनीय बताया।

38 इमारतों को ध्वस्त करने का दिया गया है आदेश

अखिलेश यादव की यह प्रतिक्रिया रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) द्वारा मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों को ध्वस्त करने के आदेश के एक दिन बाद सामने आई है। प्राधिकरण का कहना है कि इन भवनों का निर्माण बिना स्वीकृत भवन मानचित्र के किया गया था।

वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि जब इन इमारतों का निर्माण हुआ था, उस समय यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। हालांकि, आरडीए ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा है कि निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य था।

लंबे समय से विवादों में है जौहर विश्वविद्यालय

वर्ष 2006 में स्थापित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पिछले कुछ वर्षों से कथित भूमि अतिक्रमण और पट्टा शर्तों के उल्लंघन से जुड़े मामलों को लेकर कानूनी विवादों में रहा है। राज्य सरकार विश्वविद्यालय की बड़ी भूमि पहले ही अपने कब्जे में ले चुकी है। इसी वर्ष आजम खान और उनके परिवार ने विश्वविद्यालय के शासी ट्रस्ट से भी औपचारिक रूप से खुद को अलग कर लिया था।

पीडब्ल्यूडी ने सड़क को घोषित किया सार्वजनिक मार्ग

इसी बीच, उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने विश्वविद्यालय परिसर से होकर गुजरने वाली करीब तीन किलोमीटर लंबी चार लेन सड़क को सार्वजनिक मार्ग घोषित कर दिया है। विभाग ने सड़क पर सूचना बोर्ड लगाकर इसे आम लोगों के आवागमन के लिए खुला बताया है।

अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2016-17 में तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान लगभग 17.16 करोड़ रुपये की लागत से इस सड़क का निर्माण कराया गया था। यह सड़क विश्वविद्यालय के 450 एकड़ परिसर से होकर गुजरती है। वर्ष 2019 में विश्वविद्यालय का मुख्य द्वार बंद किए जाने के बाद इस मार्ग पर आवाजाही सीमित हो गई थी। अब पीडब्ल्यूडी ने इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध घोषित करते हुए संबंधित बोर्ड भी लगा दिए हैं।

 

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