कानपुर: भारतीय सेना के आधुनिकीकरण अभियान को जल्द बड़ा बल मिलने वाला है। कानपुर में निर्मित स्वदेशी AK-203 असॉल्ट राइफल अब ऑल वेदर ट्रायल के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। सेना इस अत्याधुनिक हथियार की क्षमता को भीषण ठंड, तपती गर्मी, धूल भरे इलाकों, बारिश और अत्यधिक नमी वाले वातावरण में परख रही है। सफल परीक्षणों के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से सेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा।
हर मौसम में परखी जा रही राइफल की ताकत
सेना AK-203 की विश्वसनीयता और प्रदर्शन को विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में जांच रही है। हिमाचल प्रदेश के सुमडो क्षेत्र में अत्यधिक ठंड के बीच इसका एक चरण पूरा हो चुका है, जबकि राजस्थान में तेज गर्मी और धूल भरे माहौल में परीक्षण किए गए हैं। आने वाले महीनों में बारिश और अधिक नमी वाले क्षेत्रों में भी इसकी क्षमता का मूल्यांकन किया जाएगा।
सेना पूरे एक वर्ष तक अलग-अलग मौसमों में कई चरणों में परीक्षण करेगी, ताकि लंबे समय तक उपयोग के दौरान इसकी सटीकता, मैकेनिज्म और फायरिंग क्षमता का आकलन किया जा सके।
रूस की तकनीक, लेकिन अब पूरी तरह स्वदेशी निर्माण
AK-203 परियोजना की शुरुआत भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम के तहत हुई थी, लेकिन अब इसका बड़े स्तर पर स्वदेशीकरण किया जा चुका है। राइफल के अधिकांश पुर्जे कानपुर की स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री और देश की अन्य आयुध इकाइयों में तैयार किए जा रहे हैं, जबकि अंतिम असेंबलिंग अमेठी स्थित कोरवा इकाई में की जा रही है।
जुलाई 2024 में इसके पुर्जों का निर्माण शुरू हुआ था। शुरुआती दौर में करीब 85 प्रतिशत पार्ट्स रूस से आते थे, लेकिन बाद में स्वदेशी उत्पादन को लगातार बढ़ाया गया।
इंसास की जगह लेगी नई पीढ़ी की राइफल
भारतीय सेना में AK-203 को इंसास राइफल के विकल्प के रूप में शामिल किया जा रहा है। सेना को चरणबद्ध तरीके से छह लाख से अधिक राइफलों की आपूर्ति की जानी है। रक्षा विशेषज्ञ इसे AK-47 का अधिक आधुनिक, हल्का और तकनीकी रूप से उन्नत संस्करण मानते हैं।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगा बड़ा बल
स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री के अधिकारियों के अनुसार AK-203 का स्वदेशी निर्माण आत्मनिर्भर भारत और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। सेना की निगरानी में परीक्षण पूरे होने के बाद इसे औपचारिक रूप से सेना को सौंपा जाएगा।
AK-203 की प्रमुख खूबियां
AK-203 में फोल्डिंग और एडजस्टेबल बटस्टॉक दिया गया है, जिससे इसे विभिन्न परिस्थितियों में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। यह 7.62 मिमी नाटो ग्रेड कारतूस से लैस है और इसकी 30 राउंड की मैगजीन एक मिनट में करीब 600 गोलियां दागने में सक्षम है।
राइफल 400 मीटर तक प्रभावी और सटीक फायरिंग कर सकती है। इसमें पिकेटिनी रेल और नाइट विजन सिस्टम लगाने की सुविधा भी मौजूद है, जिससे कम रोशनी में भी लक्ष्य साधना आसान हो जाता है। इसका वजन करीब 3.8 किलोग्राम है और स्टॉक मोड़ने पर इसकी लंबाई 690 मिमी रह जाती है।
AK-47 से कितनी अलग है AK-203?
AK-203 को AK-47 की तुलना में अधिक आधुनिक और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाया गया है। जहां AK-47 की लंबाई 875 मिमी और वजन लगभग 4.3 किलोग्राम है, वहीं AK-203 हल्की और अधिक कॉम्पैक्ट है। AK-47 में फोल्डिंग स्टॉक की सुविधा नहीं होती, जबकि AK-203 में यह आधुनिक फीचर उपलब्ध है। इसके अलावा AK-203 की प्रभावी रेंज और फायरिंग क्षमता भी अधिक उन्नत मानी जाती है।