राहुल गांधी पर बड़ा संसदीय संकट! अमित शाह पर टिप्पणी के बाद विशेषाधिकार हनन नोटिस, कार्रवाई की उठी मांग
नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का मामला उठाया गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को तीन पृष्ठों का नोटिस सौंपते हुए आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ असंसदीय, अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने गंभीर और पूरी तरह बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। साथ ही मामले की जांच कराकर इसे विशेषाधिकार समिति को भेजने और राहुल गांधी से सदन तथा गृह मंत्री अमित शाह दोनों से बिना शर्त माफी मंगवाने की मांग की गई है।
29 जुलाई की कार्यवाही का दिया गया हवाला
नोटिस में लोकसभा की 29 जुलाई की कार्यवाही का विशेष उल्लेख किया गया है। उस दिन लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से हुई कथित बातचीत का जिक्र किया था। अनुराग ठाकुर का आरोप है कि इस दौरान राहुल गांधी ने लोकसभा के नियम 352 का उल्लंघन किया। नोटिस के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं थी और उससे गृह मंत्री अमित शाह के व्यक्तिगत तथा आधिकारिक सम्मान को ठेस पहुंची। नोटिस में इस पूरे प्रकरण पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी की गई है।
लोकसभा में राहुल गांधी ने क्या कहा था?
29 जुलाई को एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर एक महिला छात्र से हुई बातचीत का हवाला दिया। उन्होंने किसी व्यक्ति या सांसद का नाम लिए बिना लोगों को तीन श्रेणियों में बांटते हुए उन्हें स्टूडेंट, इडियट और अंधभक्त बताया। राहुल गांधी ने कहा कि स्टूडेंट वे होते हैं जो खुले विचारों के साथ सच्चाई की तलाश करते हैं। इडियट वह व्यक्ति होता है जो खुद को भगवान मानता है और किसी की बात नहीं सुनता, जबकि अंधभक्त वह होता है जिसे पूरा विश्वास रहता है कि इडियट ही भगवान है। इस टिप्पणी पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई। इसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सदन के किसी सदस्य या किसी व्यक्ति का नाम लेकर यह टिप्पणी नहीं की, बल्कि छात्रों द्वारा कही गई बात को साझा किया है।
क्या होता है विशेषाधिकार हनन?
विशेषाधिकार हनन उस स्थिति को कहा जाता है जब संसद या विधानमंडल के किसी सदस्य अथवा सदन के अधिकारों और विशेषाधिकारों का उल्लंघन या अपमान किया जाता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत संसद के सदस्यों और अनुच्छेद 194 के तहत राज्य विधानमंडलों के सदस्यों को विशेष अधिकार प्राप्त हैं। किसी सांसद को उसके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकना, झूठे या निराधार आरोप लगाना, सदन की अवमानना करना, सदन के आदेशों की अवहेलना करना या कार्यवाही की गलत रिपोर्ट प्रकाशित करना विशेषाधिकार हनन के दायरे में आ सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित सांसद लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति को नोटिस देता है। यदि प्रथम दृष्टया मामला उचित पाया जाता है तो इसे जांच के लिए विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सकता है। दोष सिद्ध होने की स्थिति में सदन चेतावनी, निलंबन या अन्य उपयुक्त दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है।