गांवों में रोजगार की नई राह खोलेगी बायोएनर्जी, ग्रेटर नोएडा में 11 अगस्त से जुटेंगे विशेषज्ञ

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गौतमबुद्धनगर: उत्तर प्रदेश की कृषि और पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था को बायोएनर्जी क्षेत्र से जोड़कर ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा करने पर इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो (IBET Expo) 2026 में विशेष चर्चा होगी। तीन दिवसीय यह एक्सपो 11 से 13 अगस्त तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित किया जाएगा। इसमें नीति-निर्माता, उद्योग जगत, निवेशक, तकनीकी कंपनियां और शोधकर्ता बायोएनर्जी के विस्तार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को इससे जोड़ने की संभावनाओं पर मंथन करेंगे।

ग्रामीण युवाओं, किसानों और महिलाओं के लिए रोजगार पर जोर

“Advancing Bioenergy Solutions for a Low Carbon World” थीम पर आयोजित होने वाले एक्सपो में उत्तर प्रदेश के गांवों और क्लस्टर स्तर पर रोजगार सृजन की संभावनाओं को प्रमुखता दी जाएगी। खास तौर पर ग्रामीण युवाओं, किसानों, महिलाओं और स्थानीय उद्यमियों के लिए नए रोजगार और आजीविका के अवसर विकसित करने पर चर्चा होगी।

गोबर और कृषि अवशेष से तैयार होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई तस्वीर

एक्सपो में केंद्र सरकार की गोबरधन (GOBARdhan) पहल के तहत पशुओं के गोबर, कृषि अवशेष और अन्य जैविक कचरे के इस्तेमाल से बायोगैस, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक खाद तैयार करने की संभावनाओं पर चर्चा होगी। इन गतिविधियों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर गांवों में रोजगार के नए अवसर विकसित करने पर जोर रहेगा।

आईएफजीई के महानिदेशक संजय गंजू ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास अपनी कृषि और पशुधन क्षमता को उभरती बायोएनर्जी अर्थव्यवस्था से जोड़ने का बड़ा अवसर है। उनके मुताबिक, कचरे के संग्रह और परिवहन से लेकर प्लांट संचालन, जैविक खाद के प्रसंस्करण और विपणन तक पूरी प्रक्रिया ग्रामीण युवाओं, महिलाओं, किसानों और स्थानीय उद्यमियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर सकती है।

गांव स्तर पर छोटे उद्यमों को बढ़ावा देने की तैयारी

एक्सपो में इस बात पर भी चर्चा होगी कि गांव और क्लस्टर स्तर पर स्थापित बायोएनर्जी परियोजनाएं किसानों को अतिरिक्त आय देने के साथ स्थानीय रोजगार भी पैदा कर सकती हैं। ग्रामीण युवा प्लांट ऑपरेटर, तकनीशियन और सेवा प्रदाता के तौर पर काम कर सकते हैं। वहीं स्वयं सहायता समूह और स्थानीय उद्यमी जैविक कचरे के संग्रह, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन से जुड़ सकते हैं।

जैविक कचरे से ऊर्जा और आय का नया चक्र

इस मॉडल के तहत किसानों और पशुपालकों से निकलने वाले जैविक कचरे को ऊर्जा, जैविक खाद और स्थानीय बाजारों से जोड़ा जा सकता है। इससे गांवों में ही आय और रोजगार का नया चक्र विकसित होने की संभावना है। बायोएनर्जी के जरिए कचरे के बेहतर इस्तेमाल के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर रहेगा।

वित्तीय मदद और तकनीक पर भी होगा मंथन

IBET Expo 2026 में ग्रामीण बायोएनर्जी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता, आधुनिक तकनीक और नीतिगत ढांचे पर भी चर्चा की जाएगी। उद्देश्य ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और गांवों में रोजगार के नए अवसर विकसित करने के लिए जरूरी सहयोग की संभावनाएं तलाशना है। इसके जरिए उत्तर प्रदेश को ग्रामीण बायोएनर्जी और सर्कुलर इकोनॉमी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में नई संभावनाएं सामने आ सकती हैं।

 

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