योगी के काम और मोदी के चेहरे पर BJP का दांव, अखिलेश के PDA की काट के लिए तैयार किया खास चुनावी चक्रव्यूह
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति पर काम तेज कर दिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण को चुनौती देने के लिए भाजपा ने नया चुनावी खाका तैयार किया है। पार्टी की कोशिश चुनाव को जातीय समीकरणों तक सीमित होने से रोकने और कानून-व्यवस्था, विकास, सुशासन तथा सरकारी योजनाओं के लाभ को प्रमुख मुद्दा बनाने की है। इस रणनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाएगी।
भाजपा के चुनावी अभियान का प्रमुख आधार ‘2017 से पहले और 2017 के बाद’ की तुलना होगी। पार्टी सपा शासनकाल और योगी सरकार के कार्यकाल के बीच कानून-व्यवस्था, बुनियादी सुविधाओं और विकास के मुद्दों पर अंतर बताकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की तैयारी में है।
सपा शासनकाल के पुराने विवादों को फिर चुनावी मुद्दा बनाएगी BJP
भाजपा की रणनीति के तहत समाजवादी पार्टी के पुराने शासनकाल से जुड़े विवादों और घटनाओं को एक बार फिर जनता के बीच उठाया जाएगा। पार्टी इन मुद्दों के जरिए मतदाताओं को सपा सरकार के समय की राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों की याद दिलाने की कोशिश करेगी।
इस अभियान में 1995 का चर्चित स्टेट गेस्ट हाउस कांड, 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे, अवैध खनन के आरोप और माफिया तंत्र को कथित राजनीतिक संरक्षण मिलने जैसे मुद्दे शामिल किए जा सकते हैं।
भाजपा इन घटनाओं की तुलना योगी आदित्यनाथ सरकार की अपराध के खिलाफ अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति से करेगी। पार्टी का जोर यह बताने पर रहेगा कि मौजूदा सरकार में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। सुरक्षित माहौल, सख्त पुलिस व्यवस्था और 24 घंटे बिजली आपूर्ति जैसे मुद्दों के जरिए महिलाओं, युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं तक पहुंचने की योजना है।
छह संगठनात्मक क्षेत्रों में होंगी बड़ी रैलियां
भाजपा अपने चुनावी संदेश को प्रदेश के हर हिस्से तक पहुंचाने के लिए छह संगठनात्मक क्षेत्रों में बड़ी जनसभाओं और जनसंपर्क अभियानों की तैयारी कर रही है। इनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश, ब्रज, रुहेलखंड, अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल शामिल हैं।
इन कार्यक्रमों के जरिए केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की योगी सरकार के साझा विकास कार्यों को जनता के सामने रखा जाएगा। पार्टी के चुनावी प्रचार में एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार, नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों, बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और प्रदेश में हुए औद्योगिक निवेश को प्रमुखता दी जाएगी।
भाजपा का मानना है कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ के तहत सरकारी योजनाओं का लाभ पाने वाले लोगों तक सीधी पहुंच बनाना सपा के PDA समीकरण को चुनौती देने का प्रभावी तरीका हो सकता है।
किसानों, युवाओं और महिलाओं पर रहेगा विशेष फोकस
ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए भाजपा किसानों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाएगी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत सीधे बैंक खातों में भेजी जाने वाली किस्तों, गन्ना किसानों को समय पर भुगतान और सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता को चुनावी प्रचार का हिस्सा बनाया जाएगा।
पार्टी की रणनीति केवल बड़ी रैलियों तक सीमित नहीं रहेगी। बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करने के साथ पन्ना-प्रमुखों को घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करने और उनकी समस्याओं एवं सुझावों की जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके साथ ही प्रदेश नेतृत्व को सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी के भीतर गुटबाजी और आपसी मतभेद दूर कर सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी करने को कहा गया है।
BJP के यूपी 2027 चुनावी प्लान में शामिल हैं ये 10 बड़े दांव
- जातीय समीकरणों की काट: अखिलेश यादव के PDA के मुकाबले विकास, सुशासन और सरकारी योजनाओं के लाभ को चुनाव का मुख्य मुद्दा बनाना।
- सपा शासनकाल के मुद्दे: 1995 के गेस्ट हाउस कांड, 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों, अवैध खनन और माफिया तंत्र से जुड़े आरोपों को फिर उठाना।
- छह क्षेत्रों में बड़ी रैलियां: पश्चिमी यूपी, ब्रज, रुहेलखंड, अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल में व्यापक जनसभाएं आयोजित करना।
- मोदी-योगी मॉडल का प्रचार: एक्सप्रेसवे, नए हवाई अड्डे, मुफ्त राशन और औद्योगिक निवेश को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के तौर पर पेश करना।
- 2017 से पहले और बाद की तुलना: कानून-व्यवस्था, बिजली आपूर्ति और सड़कों की स्थिति के आधार पर सपा और भाजपा सरकारों के कार्यकाल में अंतर बताना।
- PDA के मुकाबले लाभार्थी वर्ग: जातीय गोलबंदी के बजाय सरकारी योजनाओं का लाभ पाने वाले अलग-अलग वर्गों को एक बड़े समर्थन आधार के रूप में जोड़ना।
- प्रमुख मतदाता समूहों पर नजर: किसान, महिलाएं, युवा और दलित-पिछड़े वर्ग के मतदाताओं तक विशेष रूप से पहुंच बनाना।
- बूथ स्तर पर मजबूत संगठन: पन्ना-प्रमुखों को सक्रिय कर हर विधानसभा क्षेत्र में घर-घर संपर्क और लगातार फीडबैक जुटाना।
- संगठन में एकजुटता: सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच मतभेद दूर कर बेहतर तालमेल बनाना।
- किसान और युवाओं से जुड़े मुद्दे: पारदर्शी सरकारी भर्तियों, रोजगार के अवसरों, पीएम-किसान की किस्तों और गन्ना भुगतान को प्रमुखता से उठाना।
मोदी का चेहरा और योगी का रिपोर्ट कार्ड बनेगा चुनावी आधार
भाजपा की पूरी रणनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल को एक साथ चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी है। पार्टी जहां केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को साझा तौर पर पेश करेगी, वहीं कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों के जरिए मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करेगी।
दूसरी ओर, अखिलेश यादव के PDA समीकरण को चुनौती देने के लिए भाजपा का जोर जातीय राजनीति से आगे बढ़कर सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों और विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने पर रहेगा। ऐसे में उत्तर प्रदेश का 2027 विधानसभा चुनाव विकास, कानून-व्यवस्था और सामाजिक समीकरणों के बीच दिलचस्प राजनीतिक मुकाबला बन सकता है।