BBAU में ‘लिविंग द विवेकानंद वे’ पर संवाद सत्र आयोजित, युवाओं को आत्मचिंतन और चरित्र निर्माण का संदेश

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लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में शुक्रवार को ‘लिविंग द विवेकानंद वे : प्रैक्टिकल स्पिरिचुअलिटी फॉर मॉडर्न इंडिया’ पुस्तक पर आधारित संवादात्मक चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। कार्यक्रम में पुस्तक के सह-लेखक एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में अनुवाद सॉल्यूशंस की डॉयरेक्टर डॉ. अनन्या अवस्थी और विवेकानंद केंद्र उत्तर प्रांत के उपप्रमुख डॉ. निखिल यादव मौजूद रहे।

इस अवसर पर मंच पर प्रसिद्ध लोकगायिका एवं समाजसेवी मालिनी अवस्थी, शिक्षा विभाग के कार्यवाहक विभागाध्यक्ष डॉ. हरिशंकर सिंह और कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुभाष मिश्रा भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद विश्वविद्यालय कुलगीत का गायन हुआ और आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को पुष्पगुच्छ, स्मृति चिन्ह और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।

युवाओं को विवेकानंद और अम्बेडकर के विचार समझने की जरूरत : कुलपति

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने पुस्तक और युवा लेखकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को स्वामी विवेकानंद और डॉ. भीमराव अम्बेडकर जैसे महान व्यक्तित्वों के जीवन, विचारों और संघर्षों को गहराई से समझने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब दुनिया भारत को केवल ‘सांप-सपेरों का देश’ कहकर देखती थी, लेकिन स्वामी विवेकानंद ने अपने ज्ञान, विचारों और आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से विश्व मंच पर भारत की नई पहचान स्थापित की। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर आशा और विश्वास के साथ देख रही है, क्योंकि योग, भारतीय ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक सोच और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ जैसी जीवन दृष्टि वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रही है।

प्रो. मित्तल ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल आर्थिक प्रगति ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों, शिक्षा, अनुसंधान और मानवीय संवेदनाओं के क्षेत्र में भी गंभीर प्रयास करने होंगे। उन्होंने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के आत्मविश्वास, राष्ट्रसेवा, अनुशासन और चरित्र निर्माण के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भारतीय दर्शन की भूमिका अहम : डॉ. अनन्या अवस्थी

डॉ. अनन्या अवस्थी ने अपने संबोधन में वर्तमान समय में दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज मानवता भू-राजनीतिक संघर्ष, पर्यावरण संकट, सामाजिक असमानता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग और युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में स्वामी विवेकानंद द्वारा प्रस्तुत वेदांत आधारित भारतीय आध्यात्मिक चिंतन पूरी दुनिया को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। भारतीय दर्शन का मूल भाव ‘एकत्व’, ‘सामंजस्य’ और ‘आपसी जुड़ाव’ है, जो यह सिखाता है कि सम्पूर्ण मानवता एक ही चेतना से जुड़ी हुई है।

डॉ. अवस्थी ने अद्वैत वेदांत और ‘थ्योरी ऑफ लिमिटेड एग्जिस्टेंस’ की चर्चा करते हुए कहा कि मनुष्य स्वयं को सीमित मानकर भय, संघर्ष और अलगाव की भावना में उलझ जाता है, जबकि वेदांत यह संदेश देता है कि हर व्यक्ति उसी परम चेतना का अभिन्न हिस्सा है।

उन्होंने युवाओं से भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और आत्मचिंतन को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।

 

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