भारत पर फिर फिदा हुए विदेशी निवेशक! सिर्फ 5 दिनों में बॉन्ड मार्केट में झोंके ₹17,000 करोड़, 16 महीने का टूटा रिकॉर्ड

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नई दिल्ली: भारतीय बॉन्ड बाजार के लिए जून 2026 बेहद उत्साहजनक साबित हो रहा है। लंबे समय तक दूरी बनाए रखने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने एक बार फिर भारतीय कर्ज बाजार में जोरदार वापसी की है। महज पांच कारोबारी दिनों के भीतर विदेशी निवेशकों ने करीब 17,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जिससे वित्तीय बाजारों में नई ऊर्जा और भरोसे का माहौल बना है।

जून 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड बाजार में लगभग 1.84 अरब डॉलर यानी करीब 17,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह पिछले 16 महीनों का सबसे बड़ा मासिक निवेश माना जा रहा है। इससे पहले मार्च 2025 में विदेशी निवेशकों ने करीब 3.69 अरब डॉलर का निवेश किया था। खास बात यह है कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान विदेशी निवेशकों ने कुल 2.07 अरब डॉलर के बॉन्ड खरीदे थे, जबकि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों अप्रैल और मई में यह निवेश केवल 130 मिलियन डॉलर रहा था।

सरकार की टैक्स राहत बनी बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी निवेशकों की वापसी के पीछे केंद्र सरकार का हालिया बड़ा फैसला प्रमुख कारण है। सरकार ने 6 जून को सरकारी बॉन्ड्स में विदेशी निवेश पर लगने वाले लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स को समाप्त कर दिया। इसके अलावा ब्याज आय पर लागू विदहोल्डिंग टैक्स भी हटा दिया गया।

इससे पहले विदेशी निवेशकों को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5 प्रतिशत, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 30 प्रतिशत और ब्याज आय पर लगभग 20 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता था। टैक्स बोझ खत्म होने के बाद भारतीय सरकारी बॉन्ड्स विदेशी निवेशकों के लिए पहले की तुलना में अधिक आकर्षक बन गए हैं।

रुपये को मिली मजबूती, यील्ड में आई गिरावट

विदेशी पूंजी के बढ़ते प्रवाह का असर भारतीय मुद्रा और बॉन्ड बाजार दोनों पर देखने को मिला है। जून महीने में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 1 प्रतिशत मजबूत हुआ है। वहीं 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7 प्रतिशत के स्तर से घटकर 6.87 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बॉन्ड यील्ड में गिरावट से सरकार के लिए उधार लेने की लागत कम होगी, जिससे वित्तीय प्रबंधन और आर्थिक स्थिरता को अतिरिक्त समर्थन मिलेगा।

आने वाले वर्षों में निवेश का खुल सकता है बड़ा रास्ता

बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि टैक्स में दी गई छूट और निवेशकों के अनुकूल अन्य सुधारों के चलते अगले दो वर्षों के दौरान भारतीय बॉन्ड बाजार में 45 से 50 अरब डॉलर तक का विदेशी निवेश आ सकता है। इसके अलावा रिजर्व बैंक द्वारा एफएआर व्यवस्था के तहत अधिक सरकारी प्रतिभूतियों को शामिल किए जाने से विदेशी निवेशकों के लिए निवेश के अवसर और बढ़ गए हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं तो भारत आने वाले समय में विदेशी बॉन्ड निवेश का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

 

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