नोएडा में AI सिटी से लेकर ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स तक, 224वीं बोर्ड बैठक में 11 बड़े फैसले; कई शुल्कों में भी कटौती

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नोएडा: नोएडा प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक में शहर के विकास, औद्योगिक गतिविधियों, कारोबारी सुविधाओं, किसानों के आबादी भूखंडों और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। 28 अक्टूबर 2026 को अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त और नोएडा प्राधिकरण के अध्यक्ष दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में मॉडल भवन विनियम 2026 अपनाने, सेक्टर-147 में आईटी/आईटीईएस भूखंड योजना, सेक्टर-105 में एकीकृत ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स और नोएडा में एआई सिटी सह बिजनेस पार्क विकसित करने जैसे प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में औद्योगिक इकाइयों के अंतरण शुल्क में कटौती, मोबाइल टावर की अनुमति प्रक्रिया ऑनलाइन करने और प्राधिकरण की संपत्तियों पर करीब 15 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के फैसले भी शामिल रहे।

बैठक में नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रवि कुमार एनजी, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह और बोर्ड के अन्य सदस्य शामिल हुए।

1. मॉडल भवन विनियम 2026 को मंजूरी

उत्तर प्रदेश शासन की ओर से जारी मॉडल भवन विनियम 2026 को नोएडा में लागू करने की स्वीकृति दी गई। नए नियमों के तहत प्राधिकरण बोर्ड के स्तर पर लिए जाने वाले निर्णयों से संबंधित प्रावधानों का लाभ लागू करने के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों की संयुक्त समिति गठित करने का फैसला भी लिया गया।

2. सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान की अंतिम रिपोर्ट मंजूर

नोएडा के लिए तैयार सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान की अंतिम रिपोर्ट को बोर्ड ने मंजूरी दे दी। इसे अब शासन की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। योजना में औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों, माल परिवहन, यातायात प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं का समग्र अध्ययन किया गया है।

इस योजना का उद्देश्य माल की ढुलाई और वितरण को अधिक प्रभावी बनाना, लॉजिस्टिक्स लागत घटाना, यातायात जाम और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना तथा संबंधित विभागों, औद्योगिक इकाइयों और परिवहन संचालकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। इससे शहर में कारोबार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

3. सेक्टर-147 में 68 हजार वर्गमीटर भूमि पर आईटी परियोजना

नोएडा के सेक्टर-147 में संस्थागत आईटी/आईटीईएस उपयोग के लिए 68,000 वर्गमीटर भूमि पर भूखंड आवंटन योजना प्रकाशित करने की सैद्धांतिक अनुमति दी गई। इसका उद्देश्य विश्वस्तरीय वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) और ग्रेड-ए कार्यालयों के लिए जगह विकसित करना है। यह कदम उत्तर प्रदेश में आईटी क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

4. सेक्टर-105 में बनेगा एकीकृत ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स

सेक्टर-105 में 12,596.64 वर्गमीटर वाणिज्यिक भूमि पर एकीकृत ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स विकसित करने की योजना को स्वीकृति मिली। पूरी भूमि एक भूखंड के रूप में एकल बोली के माध्यम से एक पट्टाधारक को दी जाएगी।

योजना के तहत अधिकतम 4.0 एफएआर और 20 मीटर ऊंचाई की अनुमति होगी। भूखंड के भीतर नियमानुसार पार्किंग की व्यवस्था करनी होगी। पट्टा प्रलेख के निष्पादन के पांच वर्ष के भीतर अधिकतम तीन चरणों में निर्माण पूरा कर अधिभोग प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा।

5. नोएडा में विकसित होगी एआई सिटी सह बिजनेस पार्क

बोर्ड ने उत्तर प्रदेश निजी बिजनेस पार्क विकास योजना, 2025 को अपनाने और इसके अंतर्गत नोएडा में एआई सिटी सह बिजनेस पार्क विकसित करने के लिए मास्टर डेवलपर के चयन संबंधी प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी।

परियोजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), वैश्विक क्षमता केंद्र, आईटी और आईटीईएस, अनुसंधान, स्टार्टअप तथा कौशल विकास से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मास्टर डेवलपर का चयन प्रतिस्पर्धात्मक ई-बोली के माध्यम से किया जाएगा। परियोजना का विकास डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण यानी डीबीएफओटी मॉडल पर होगा।

भूमि का स्वामित्व नोएडा प्राधिकरण के पास ही रहेगा। निर्धारित शर्तों के अधीन 45 वर्ष की रियायत अवधि को अतिरिक्त 45 वर्ष तक बढ़ाने का प्रावधान होगा। साथ ही, निर्मित क्षेत्र का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा आईटी और ज्ञान आधारित सेवाओं के लिए आरक्षित रखा जाएगा।

6. सेक्टर-32 में उपपट्टाधारकों का भू-भाटक घटेगा

सेक्टर-32 के वाणिज्यिक भूखंड सीसी-01 पर बनी इकाइयों के उपपट्टाधारकों से लिए जाने वाले भू-भाटक की दर में एकरूपता लाने को मंजूरी दी गई। अब तक 612 रुपये प्रति वर्गमीटर वार्षिक की दर से लिया जा रहा भू-भाटक पुनर्गणना के बाद लगभग 232 रुपये प्रति वर्गमीटर वार्षिक किए जाने का निर्णय लिया गया है।

इस बदलाव से संबंधित वाणिज्यिक इकाइयों के उपपट्टाधारकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

7. एचयूएफ, सोसाइटी और ट्रस्ट के नाम भी हो सकेगा उपपट्टा

बोर्ड ने वाणिज्यिक भूखंडों, उन पर बनी इकाइयों और निर्मित वाणिज्यिक संपत्तियों के उपपट्टा प्रलेख के निष्पादन तथा अंतरण की सुविधा हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ), सोसाइटी और ट्रस्ट के पक्ष में देने को मंजूरी दी। यह सुविधा एक से अधिक व्यक्तियों के नाम पर भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे पात्र आवेदकों के लिए वाणिज्यिक संपत्तियों से संबंधित प्रक्रियाएं आसान होंगी।

8. औद्योगिक इकाइयों के अंतरण शुल्क में कटौती

औद्योगिक इकाइयों से संबंधित एकीकृत विनियम, 2025 में संशोधन के लिए गठित संयुक्त समिति की सिफारिशों को मंजूरी दी गई। इसके तहत कार्यशील औद्योगिक इकाइयों का अंतरण शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करने का फैसला लिया गया।

इकाई को कार्यशील करने की मूल अवधि तीन या पांच वर्ष पूरी होने के बाद अधिकतम तीन वर्ष तक साल-दर-साल समयवृद्धि दी जा सकेगी। निर्माण और इकाई को कार्यशील करने के लिए पहले, दूसरे और तीसरे अतिरिक्त वर्ष का समयवृद्धि शुल्क क्रमशः 3, 5 और 7 प्रतिशत तय किया गया है।

अंशधारिता में बदलाव की सूचना देने में देरी का शुल्क 500 रुपये से घटाकर 300 रुपये प्रतिदिन करने को भी मंजूरी दी गई। निर्धारित शर्तों के तहत प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से सीमित दायित्व भागीदारी (एलएलपी) में परिवर्तन की प्रक्रिया सरल बनाने और पारिवारिक अंशधारिता में बदलाव पर शुल्क छूट के लिए शासन की निर्धारित परिवार संबंधी परिभाषा अपनाने का निर्णय भी लिया गया।

9. मोबाइल टावर और राइट ऑफ वे की अनुमति होगी ऑनलाइन

भारत सरकार की 17 सितंबर 2024 की अधिसूचना के अनुरूप दूरसंचार नीति अपनाने और मोबाइल टावर तथा राइट ऑफ वे से जुड़ी अनुमतियों की प्रक्रिया ऑनलाइन करने को स्वीकृति दी गई।

नई व्यवस्था में पहले से लागू एक लाख रुपये के आवेदन शुल्क, पहले से स्थापित टावर के लिए डेढ़ लाख रुपये के आवेदन शुल्क और तीन लाख रुपये की बैंक गारंटी की शर्त का प्रावधान नहीं होगा। हालांकि, भूमि के ऊपर दूरसंचार नेटवर्क स्थापित करने के आवेदन की जांच के लिए 10,000 रुपये का शुल्क पहले की तरह बना रहेगा।

10. किसानों के पांच प्रतिशत आबादी भूखंडों के निस्तारण का रास्ता खुलेगा

नोएडा प्राधिकरण की ओर से अर्जित भूमि के बदले किसानों को पांच प्रतिशत विकसित आवासीय भूमि देने का प्रावधान है। प्राधिकरण के अनुसार, अधिकांश पांच प्रतिशत आबादी भूखंडों का नियोजन हो चुका है, जबकि कुछ मामलों में यह प्रक्रिया अभी बाकी है। नोएडा महायोजना-2031 के तहत शहर का विकास लगभग पूरा हो जाने के कारण शेष भूखंडों के नियोजन में कठिनाइयां आ रही हैं।

किसानों की मांग को देखते हुए इन मामलों का तेजी से निस्तारण करने के लिए नोएडा महायोजना-2031 के जोनिंग नियमों में संशोधन का प्रस्ताव मंजूर किया गया। इसके तहत प्रमुख भू-उपयोग क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों और उपयोगों की अनुमति से संबंधित प्रावधानों में नया बिंदु तथा एक अतिरिक्त शर्त शामिल की जाएगी।

प्रस्ताव के अनुसार, मौजूदा गांव की आबादी से सटी भूमि पर पांच प्रतिशत आबादी भूखंडों के नियोजन की अनुमति देने से पहले आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव प्राप्त किए जाएंगे। इसके बाद मामले को शासन के पास भेजा जाएगा।

11. प्राधिकरण की संपत्तियों पर लगेंगे करीब 15 मेगावाट के सौर संयंत्र

नोएडा प्राधिकरण के सीवेज शोधन संयंत्रों, बहुस्तरीय कार पार्किंग स्थलों और गंगाजल भूमिगत जलाशयों पर नवीकरणीय ऊर्जा सेवा कंपनी (आरईएससीओ) पद्धति के तहत करीब 15 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने को मंजूरी दी गई।

योजना के तहत सीवेज शोधन संयंत्रों और जलाशयों पर लगभग 8 मेगावाट तथा बहुस्तरीय कार पार्किंग स्थलों पर करीब 7 मेगावाट क्षमता के सौर संयंत्र लगाए जाएंगे। परियोजना को संबंधित एजेंसी के साथ बिजली खरीद समझौते के आधार पर लागू किया जाएगा।

प्राधिकरण के मुताबिक, इससे बिजली खर्च में बचत और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। परियोजना से अगले 25 वर्षों में करीब पांच लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम होने का अनुमान है।

 

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