New Tax Regime में डेट फंड की कमाई पर मिलेगा ₹12 लाख वाला रिबेट? ITR भरने से पहले समझ लें पूरा नियम

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नई दिल्ली: नई टैक्स व्यवस्था में ₹12 लाख तक की आय पर टैक्स रिबेट को लेकर लोगों के बीच काफी चर्चा है। इसी बीच डेट म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों के मन में बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या डेट फंड से होने वाली कमाई भी इस रिबेट के दायरे में आती है? खासतौर पर वे लोग जो फिक्स्ड डिपॉजिट की जगह डेट फंड को बेहतर विकल्प मानकर निवेश कर रहे हैं, उनके लिए यह नियम समझना बेहद जरूरी हो गया है।

टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, नई टैक्स व्यवस्था में मिलने वाला रिबेट आपकी कुल टैक्सेबल इनकम पर आधारित होता है। यानी आपकी सैलरी, बिजनेस इनकम और निवेश से हुई कमाई को जोड़कर कुल आय तय की जाती है। अगर यह आय निर्धारित सीमा के भीतर रहती है, तभी धारा 87A के तहत टैक्स रिबेट का लाभ मिलता है।

डेट फंड पर अब कैसे लगता है टैक्स?

1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए ऐसे डेट म्यूचुअल फंड, जिनमें घरेलू इक्विटी हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से कम है, उन पर टैक्स नियम बदल चुके हैं। अब इन फंड्स से होने वाला मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन की तरह माना जाता है और इसे सीधे आपकी सालाना आय में जोड़ दिया जाता है।

इसका मतलब साफ है कि डेट फंड की कमाई पर कोई अलग टैक्स रेट लागू नहीं होता, बल्कि यह आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होती है। यानी अगर आपकी कुल आय ₹12 लाख या उससे कम रहती है, तो डेट फंड से हुई कमाई भी रिबेट के दायरे में आ सकती है।

कब मिलेगा पूरा टैक्स रिबेट?

मान लीजिए किसी व्यक्ति की सालाना सैलरी ₹10.80 लाख है और उसे डेट फंड से ₹70,000 का मुनाफा हुआ। इस स्थिति में उसकी कुल टैक्सेबल इनकम ₹11.50 लाख होगी। चूंकि कुल आय ₹12 लाख से कम है, इसलिए वह धारा 87A के तहत टैक्स रिबेट का फायदा ले सकता है और संभव है कि उसे कोई टैक्स न देना पड़े।

यहां हो सकती है बड़ी गलती

डेट फंड निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम तब पैदा होता है जब कुल आय ₹12 लाख की सीमा पार कर जाती है। उदाहरण के तौर पर यदि आपकी सैलरी ₹11.50 लाख है और डेट फंड से ₹60,000 का मुनाफा होता है, तो आपकी कुल आय ₹12.10 लाख पहुंच जाएगी।

ऐसी स्थिति में आप धारा 87A के तहत मिलने वाले टैक्स रिबेट से बाहर हो सकते हैं। इसके बाद केवल अतिरिक्त ₹10,000 पर ही नहीं, बल्कि टैक्स स्लैब के अनुसार पूरी करयोग्य आय पर टैक्स देना पड़ सकता है। यही वजह है कि ITR फाइल करने से पहले कुल इनकम का सही हिसाब लगाना बेहद जरूरी हो जाता है।

ITR भरने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

टैक्स विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डेट फंड, FD ब्याज, बोनस, फ्रीलांस इनकम या अन्य निवेश से हुई कमाई को नजरअंदाज न करें। छोटी अतिरिक्त आय भी आपकी कुल इनकम को ₹12 लाख की सीमा से ऊपर पहुंचा सकती है, जिससे टैक्स देनदारी अचानक बढ़ सकती है।

नई टैक्स व्यवस्था चुनने वाले निवेशकों को अपनी कुल टैक्सेबल इनकम का पहले से अनुमान लगाकर निवेश और रिडेम्प्शन की योजना बनानी चाहिए, ताकि रिबेट का पूरा फायदा मिल सके।

 

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