खामेनेई के अंतिम संस्कार पर ईरान का बड़ा फैसला, यूरोपीय देशों को नहीं बुलाया; भारत से दो प्रतिनिधि होंगे शामिल
तेहरान: ईरान ने अपने पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह को लेकर बड़ा कूटनीतिक संदेश दिया है। ईरानी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी यूरोपीय देश को इस कार्यक्रम में आधिकारिक निमंत्रण नहीं भेजा जाएगा। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जिन देशों ने महत्वपूर्ण समय में ईरान का साथ नहीं दिया और उसके खिलाफ नीतियों का समर्थन किया, उन्हें इस समारोह में शामिल होने का अवसर नहीं दिया जाएगा।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि अंतिम संस्कार कार्यक्रम के लिए किसी भी यूरोपीय देश को आमंत्रित नहीं किया गया है। मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ऐसे देशों को निमंत्रण नहीं दिया जाएगा जो “इतिहास के गलत पक्ष” में खड़े रहे हैं। इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
4 जुलाई से शुरू होंगी अंतिम संस्कार की रस्में
सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्में 4 जुलाई से शुरू होंगी। इसके बाद 9 जुलाई को उन्हें मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। उनकी मृत्यु के लगभग 133 दिन बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होगी।
भारत की ओर से दो प्रतिनिधि होंगे मौजूद
रिपोर्टों के अनुसार, भारत सरकार की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन अंतिम संस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। दोनों नेता कार्यक्रम में शामिल होकर भारत की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
यूरोप को संदेश देने की कोशिश?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि यूरोपीय देशों को निमंत्रण न देना केवल औपचारिक निर्णय नहीं है। इसे पश्चिमी देशों, विशेषकर यूरोप और उसके सहयोगियों के प्रति ईरान की नाराजगी के सार्वजनिक प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। विदेश मंत्रालय की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि ईरान फिलहाल अपने आलोचक देशों के प्रति नरम रुख अपनाने के पक्ष में नहीं है।