Mission ShaktiSAT: 108 देशों की छात्राओं के साथ अंतरिक्ष की नई उड़ान, सीएम योगी ने किया शुभारंभ; सैटेलाइट से सिस्टम इंजीनियरिंग तक मिलेगा प्रशिक्षण
गौतमबुद्धनगर: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के 19वें स्थापना दिवस और राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्चुअल माध्यम से अंतरराष्ट्रीय ‘मिशन शक्तिसैट’ का शुभारंभ किया। 23 से 31 अगस्त तक चलने वाले इस मिशन में भारत समेत 108 देशों की छात्राएं हिस्सा ले रही हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को अंतरिक्ष विज्ञान, उपग्रह निर्माण, पेलोड, इलेक्ट्रॉनिक्स और सिस्टम इंजीनियरिंग की व्यावहारिक जानकारी देकर भविष्य की वैज्ञानिक और तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
युवाओं को फ्यूचर-रेडी और नेशन-रेडी बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर विश्वविद्यालय परिवार को बधाई देते हुए कहा कि पिछले 19 वर्षों में संस्थान ने भगवान बुद्ध के ज्ञान, करुणा, शांति और मानवता के मूल्यों को आधुनिक विज्ञान, शोध और नवाचार से जोड़ने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि चरित्र, प्रतिभा, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करना भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, क्वांटम तकनीक, अंतरिक्ष तकनीक और नई डिजिटल अर्थव्यवस्था रोजगार तथा विकास की दिशा बदल रही हैं। ऐसे दौर में विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य, नवाचार और राष्ट्र के लिए तैयार करना है।
‘नेशन फर्स्ट’ की भावना से राष्ट्र निर्माण में योगदान का आह्वान
मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपने करियर को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को भारत की समस्याओं के समाधान खोजने और देश को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान देना चाहिए। उनके मुताबिक युवाओं की सफलता की जड़ें भारत की मिट्टी में और दृष्टि पूरी दुनिया पर होनी चाहिए। वे किसी भी क्षेत्र में जाएं, लेकिन उनका संकल्प ‘नेशन फर्स्ट’ होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 2047 का भारत आज का युवा तैयार करेगा। उत्तर प्रदेश के युवाओं की जिम्मेदारी इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि यह प्रदेश भगवान बुद्ध की करुणा और प्रज्ञा की धरती होने के साथ-साथ नए भारत की आर्थिक और औद्योगिक शक्ति के रूप में भी आगे बढ़ रहा है।
उत्तर प्रदेश में तकनीक और उद्योग के नए अवसरों का जिक्र
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश की पहचान में बड़ा बदलाव आया है। आज प्रदेश में कानून-व्यवस्था, निवेश, बुनियादी ढांचे, तकनीक, पर्यटन, स्टार्टअप और रोजगार के नए अवसरों की चर्चा हो रही है। एक्सप्रेसवे, नए हवाई अड्डे, मेट्रो और रैपिड रेल ने आवागमन को बेहतर किया है।
उन्होंने कहा कि रक्षा औद्योगिक गलियारा, एक जिला एक उत्पाद, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इलेक्ट्रॉनिक्स, डीप-टेक और स्टार्टअप व्यवस्था युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्राथमिकता ऐसे मानव संसाधन के निर्माण की है जो कुशल होने के साथ नवाचारी भी हो और तकनीक को अपनाने के साथ अपनी संस्कृति से भी जुड़ा रहे।
गौतमबुद्ध नगर को तकनीक और निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में बताया
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है और गौतमबुद्ध नगर तकनीक, उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टार्टअप तथा वैश्विक निवेश के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। ऐसे माहौल में विश्वविद्यालयों को परिसर से उद्योग, शोध से नवाचार और ज्ञान से उद्यम तक युवाओं की प्रतिभा को जोड़ने वाली कड़ी बनना होगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय का अगला दशक वैश्विक उत्कृष्टता का दशक होगा। विश्वविद्यालय आधुनिक विज्ञान और मानवीय मूल्यों के संगम का वैश्विक उदाहरण बनेगा और उत्तर प्रदेश की नई पहचान को दुनिया के सामने मजबूत करेगा।
108 देशों की छात्राओं की भागीदारी से मिला अंतरराष्ट्रीय स्वरूप
मिशन शक्तिसैट में भारत सहित 108 देशों की छात्राएं शामिल हो रही हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि इतने देशों की छात्राओं का एक साझा मंच पर आना इस बात को दर्शाता है कि विज्ञान और अंतरिक्ष तकनीक पूरी मानवता को जोड़ने की क्षमता रखते हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि उनमें वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता, नवाचार और वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करना भी है। उन्होंने पिछले एक वर्ष में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों की शोध, नवाचार, खेल और शैक्षणिक गतिविधियों में उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।

उपग्रह निर्माण से लेकर अंतरिक्ष मिशन तक मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
मिशन शक्तिसैट के तहत प्रतिभागियों को अंतरिक्ष विज्ञान, उपग्रह तकनीक, पेलोड विकास, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिस्टम इंजीनियरिंग और विज्ञान-तकनीक आधारित शिक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञों से प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलेगा। छात्राओं को उपग्रह निर्माण की प्रक्रिया को अवधारणा तैयार करने से लेकर डिजाइन, विकास, परीक्षण और अंतरिक्ष में तैनाती तक समझने का अवसर मिलेगा।
मिशन के तहत छात्राओं द्वारा तैयार किए जाने वाले उपग्रहों में ShakthiSAT-LEO और ShakthiSAT-Moon भी शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य छात्राओं को अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीक से जोड़ने के साथ वैज्ञानिक, तकनीकी और शोध के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
राकेश शर्मा ने विद्यार्थियों को बताया पृथ्वी के भविष्य का संरक्षक
भारत के प्रथम अंतरिक्ष यात्री विंग कमांडर राकेश शर्मा ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में हिस्सा लिया और मिशन शक्तिसैट के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे पृथ्वी ग्रह के भविष्य के संरक्षक हैं। उन्होंने युवाओं से अपने ज्ञान और प्रतिभा का इस्तेमाल पृथ्वी और मानवता के बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए करने का आह्वान किया।
मिशन शक्तिसैट की संस्थापक डॉ. केसन ने कहा कि यह पहल किसी एक देश तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य दुनिया भर की प्रतिभाशाली छात्राओं को अंतरिक्ष शिक्षा के माध्यम से एक मंच पर लाकर वैज्ञानिक सहयोग और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।

शोध और नवाचार में योगदान देने वाले शिक्षकों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट शोध, पेटेंट और पुस्तकों के प्रकाशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विश्वविद्यालय के शिक्षकों को सम्मानित किया गया। डॉ. विक्रांत नैन को प्रथम, डॉ. नागेंद्र को द्वितीय और डॉ. शक्ति शाही को तृतीय स्थान प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाने वाली संगीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। विभिन्न क्षेत्रों की परंपराओं पर आधारित प्रस्तुतियों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को भारतीय संस्कृति से परिचित कराया।
महिला सशक्तिकरण और वैज्ञानिक सहयोग को मिलेगी नई दिशा
मिशन शक्तिसैट के जरिए भारत सहित 108 देशों की छात्राओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जोड़कर विज्ञान, अंतरिक्ष तकनीक, नवाचार और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में तकनीकी प्रशिक्षण के साथ नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, रचनात्मकता, समस्या समाधान, वैज्ञानिक सोच और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।