NEET UG में उम्र और प्रयासों की सीमा तय करने की तैयारी? संसदीय समिति ने की सिफारिश, परीक्षा के तरीके में भी बदलाव का सुझाव
नई दिल्ली: मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक (NEET UG) में अधिकतम उम्र और परीक्षा में शामिल होने के प्रयासों की संख्या तय करने पर फिर विचार हो सकता है। शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने NEET UG समेत प्रमुख परीक्षाओं के लिए उम्र और प्रयासों की उचित सीमा निर्धारित करने की संभावनाएं तलाशने की सिफारिश की है। फिलहाल NEET UG में शामिल होने के लिए न तो अधिकतम आयु सीमा निर्धारित है और न ही प्रयासों की संख्या पर कोई पाबंदी है। समिति ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधारों से संबंधित अपनी 382वीं रिपोर्ट शुक्रवार को पेश की। इस समिति के प्रमुख राज्यसभा में कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक हैं।
70 साल से अधिक उम्र के उम्मीदवार भी दे रहे NEET
संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, उसे बताया गया कि NEET UG में उम्मीदवार कितनी भी बार परीक्षा दे सकते हैं। परीक्षा में शामिल होने के लिए अधिकतम उम्र की भी कोई सीमा नहीं है। इसी व्यवस्था के चलते 70 वर्ष से अधिक उम्र के अभ्यर्थी भी परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। वर्ष 2026 की NEET UG परीक्षा में 71 वर्षीय अशोक बहारा के शामिल होने का मामला भी सामने आया था।
समिति ने शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर इस मुद्दे पर विचार करने की सिफारिश की है। हालांकि, यह उम्र और प्रयासों की सीमा तत्काल लागू करने का फैसला नहीं है। फिलहाल संबंधित मंत्रालयों और पक्षों के साथ मिलकर इसकी संभावनाओं पर विचार करने का सुझाव दिया गया है।
2017 में लागू हुई थी उम्र और प्रयासों की सीमा
NEET में पहले भी उम्र और प्रयासों को लेकर पाबंदियां लागू की जा चुकी हैं। वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने परीक्षा में अधिकतम तीन बार शामिल होने की सीमा तय की थी। उस समय सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए अधिकतम उम्र 25 वर्ष और आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 30 वर्ष निर्धारित की गई थी।
हालांकि, इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने आयु सीमा के मामले में हस्तक्षेप किया। इसके बाद अदालत में कार्यवाही लंबित रहने के दौरान 25 वर्ष और उससे अधिक उम्र के उम्मीदवारों को NEET UG 2019 के लिए अस्थायी रूप से आवेदन करने की अनुमति दी गई। बाद में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मार्च 2022 में अधिकतम आयु सीमा हटा दी। मौजूदा व्यवस्था में NEET UG के लिए न तो अधिकतम उम्र और न ही परीक्षा में शामिल होने के प्रयासों की कोई निर्धारित सीमा है।
इसके विपरीत, JEE Advanced में आयु से संबंधित पात्रता शर्तें लागू हैं। इस परीक्षा में उम्मीदवार लगातार दो वर्षों के दौरान अधिकतम दो बार शामिल हो सकते हैं।
NEET UG को कंप्यूटर आधारित परीक्षा बनाने का सुझाव
संसदीय समिति ने NEET UG को पारंपरिक कलम-कागज आधारित परीक्षा के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT मोड में आयोजित करने का सुझाव भी दिया है। पैनल का कहना है कि इस व्यवस्था के लिए केंद्र या राज्य सरकारों के स्वामित्व और संचालन वाले परीक्षा केंद्र विकसित किए जाने चाहिए।
समिति के मुताबिक, कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू करने से पहले सुरक्षित सरकारी बुनियादी ढांचे में निवेश करना जरूरी है। इसमें खास तौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान देने की बात कही गई है। परीक्षा के तरीके में बदलाव करते समय उम्मीदवारों की सुविधा और परीक्षा तक उनकी पहुंच को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है, ताकि क्षेत्रीय असमानताओं के कारण किसी विद्यार्थी को नुकसान न हो।
हर जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र बनाने की सिफारिश
परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाने के साथ समिति ने प्रत्येक जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र स्थापित करने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए लंबी दूरी तय करने से राहत दिलाना है। इससे यात्रा और ठहरने पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है।
समिति ने कहा कि परीक्षा केंद्रों की बेहतर उपलब्धता से उम्मीदवारों को सुविधा मिलेगी और परीक्षा में उनकी भागीदारी आसान होगी। कंप्यूटर आधारित परीक्षा की व्यवस्था तैयार करते समय भी इसी तरह की जरूरतों का ध्यान रखने पर जोर दिया गया है।
प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए NTA की जवाबदेही तय करने का सुझाव
NEET UG में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षाएं रद्द होने जैसी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए समिति ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विधायी तंत्र बनाने का सुझाव दिया है। इसके तहत NTA की संसद के दोनों सदनों के प्रति जवाबदेही तय करने पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में परीक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बनाए रखने को सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय अखंडता से जुड़ा विषय बताया गया है। समिति का मानना है कि परीक्षा संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों का भरोसा कायम रहे।
प्रश्न बैंक बढ़ाने और देर से पहुंचने वाले विद्यार्थियों को राहत देने की सिफारिश
संसदीय समिति ने प्रश्न बैंक का व्यापक विस्तार करने की सिफारिश भी की है। पैनल के मुताबिक, प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं से लंबे समय तक बचाव के लिए प्रश्न बैंकों में निवेश करना व्यावहारिक उपाय हो सकता है। एक ही प्रश्न समूह का बार-बार इस्तेमाल करना या हर साल परीक्षकों से नए प्रश्नपत्र तैयार करवाना परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
इसके अलावा, समिति ने परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचने वाले विद्यार्थियों को लिखित वचन देने के बाद परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का सुझाव दिया है। इन सिफारिशों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक भरोसेमंद बनाना, उम्मीदवारों की पहुंच बेहतर करना और NTA की कार्यप्रणाली में सुधार की संभावनाओं पर ध्यान देना है।