1 मई से सख्त होंगे चाय आयात के नियम: लैब टेस्ट के बिना बिक्री नहीं, नेपाल के निर्यातकों पर बढ़ेगा दबाव

0 24

नई दिल्ली। देश में चाय की गुणवत्ता को लेकर सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। बढ़ते आयात और मिलावट की आशंकाओं के बीच 1 मई से नए नियम लागू किए जाएंगे, जिनके तहत विदेश से आने वाली हर चाय की खेप की अनिवार्य जांच होगी। इस फैसले का सीधा असर नेपाल समेत अन्य देशों के निर्यातकों पर पड़ने की संभावना है, जहां से भारत में बड़ी मात्रा में चाय का निर्यात होता है।

हर खेप की होगी लैब टेस्टिंग, बिना मंजूरी नहीं मिलेगी बाजार में एंट्री
टी बोर्ड इंडिया की अधिसूचना के अनुसार, 1 मई से भारत में आने वाली सभी चाय खेपों की लैब टेस्टिंग अनिवार्य होगी। नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत हर खेप की सैंपलिंग और परीक्षण किया जाएगा। हालांकि इंस्टेंट टी और रेडी-टू-ड्रिंक चाय को इस नियम से छूट दी गई है। गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली चाय को देश में बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

आयात प्रक्रिया होगी पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी
नए नियमों के तहत आयातकों को टी काउंसिल पोर्टल पर चाय के आगमन की तारीख, गोदाम का स्थान, कंटेनर विवरण और प्रोफॉर्मा इनवॉइस जैसी जानकारी दर्ज करनी होगी। हर सैंपल के लिए 11,120 रुपये का शुल्क और लागू जीएसटी देना होगा। अधिकारियों द्वारा कंटेनरों का चयन कर 24 घंटे के भीतर 500-500 ग्राम के दो नमूने लिए जाएंगे। यदि बंदरगाह पर सैंपलिंग संभव नहीं हुई, तो गोदामों से नमूने लिए जाएंगे।

14 दिन में रिपोर्ट, ‘पास’ या ‘फेल’ का होगा फैसला
मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं को 14 दिनों के भीतर परीक्षण रिपोर्ट अपलोड करनी होगी, जिसमें खेप को ‘पास’ या ‘फेल’ के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। जब तक अंतिम मंजूरी नहीं मिलती, तब तक आयातित चाय को अलग से गोदाम में रखा जाएगा और उसे न तो घरेलू बाजार में बेचा जा सकेगा और न ही दोबारा निर्यात किया जा सकेगा।

फेल होने पर नष्ट या वापस भेजनी होगी खेप
अगर किसी सैंपल में खामी पाई जाती है, तो आयातक 15,000 रुपये अतिरिक्त शुल्क देकर दूसरी लैब में पुनः परीक्षण का अनुरोध कर सकते हैं। दूसरी बार भी रिपोर्ट फेल होने पर उस खेप को या तो नष्ट करना होगा या फिर मूल देश में वापस भेजना होगा।

नेपाल के निर्यातकों के सामने बढ़ीं चुनौतियां
इन नए नियमों का सबसे ज्यादा असर नेपाल के चाय निर्यातकों पर पड़ सकता है। नेपाल टी प्लांटर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता ने आशंका जताई है कि इस व्यवस्था से चाय का निर्यात लगभग ठप हो सकता है। उनका कहना है कि जब तक लैब रिपोर्ट नहीं आती, तब तक मालवाहक वाहन काकरविट्टा कस्टम्स पर खड़े रहेंगे।

लॉजिस्टिक दिक्कतें भी बनीं बड़ी चिंता
निर्यातकों ने यह भी कहा है कि काकरविट्टा कस्टम्स पर पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं है, जिससे लंबी अवधि तक वाहनों को खड़ा रखना मुश्किल होगा। ऐसे में सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और कारोबार पर असर पड़ना तय है।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.