गौतमबुद्ध नगर में श्रमिकों के स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त, जिलाधिकारी ने निजी अस्पतालों के साथ की अहम बैठक, मेडिकल कैंप बढ़ाने के दिए निर्देश
गौतमबुद्ध नगर: जिले में कार्यरत श्रमिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और निजी अस्पताल संचालकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें श्रमिकों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए समन्वित प्रयासों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
श्रमिकों के जीवन स्तर सुधार पर प्रशासन का फोकस
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर प्रदेश की आर्थिक राजधानी के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है, जहां बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां कार्यरत हैं और लाखों श्रमिक रोजगार से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री के नेतृत्व में श्रमिकों के लिए आवास, स्वास्थ्य, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।
CSR के तहत मेडिकल कैंप लगाने के निर्देश
जिलाधिकारी ने निजी अस्पताल संचालकों से अपील की कि वे अपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित रूप से मेडिकल कैंप आयोजित करें। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि इन कैंपों में महिला श्रमिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि मेडिकल कैंपों में श्रमिकों और उनके परिजनों के लिए नेत्र परीक्षण, स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मोबाइल मेडिकल वैन और मिनी ओपीडी पर जोर
जिलाधिकारी ने औद्योगिक क्षेत्रों, कंस्ट्रक्शन साइट्स और लेबर कॉलोनियों में मोबाइल मेडिकल वैन और मिनी ओपीडी सेवाएं शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नेत्र जांच शिविरों के माध्यम से जरूरतमंद श्रमिकों को चश्मा उपलब्ध कराया जाए और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों का समय पर इलाज सुनिश्चित हो।
कंस्ट्रक्शन साइट्स पर नियमित स्वास्थ्य जांच अनिवार्य
बैठक में कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने और मोबाइल मेडिकल सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने निजी अस्पतालों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपेक्षा की।
माइक्रो प्लान और नोडल अधिकारी की नियुक्ति के निर्देश
जिलाधिकारी ने सभी निजी अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाकर विस्तृत माइक्रो प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रत्येक अस्पताल में एक नोडल अधिकारी नामित कर उसकी जानकारी जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने को कहा गया, ताकि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर सख्त निर्देश
स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिम्स अस्पताल में डॉक्टरों, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। किसी भी स्तर पर कमी पाए जाने पर उसे तुरंत दूर किया जाए।
आयुष्मान भारत योजना के विस्तार पर भी जोर
बैठक में आयुष्मान भारत योजना के तहत अधिक से अधिक अस्पतालों को पैनल में शामिल करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि श्रमिकों और उनके परिवारों को अधिकतम लाभ मिल सके। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जिला अस्पताल के प्रतिनिधि और निजी अस्पताल संचालक मौजूद रहे, जहां सभी ने अपने सुझाव भी प्रस्तुत किए।