सिद्धार्थनगर के कालानमक चावल का कमाल, कुकीज़ बनकर पहुंचा फ्रांस; यूपीआईटीएस-2026 में मिले 4 करोड़ के कारोबार के संकेत

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गौतमबुद्धनगर: सिद्धार्थनगर के खेतों में तीन पीढ़ियों से उगाया जा रहा कालानमक चावल अब नए रूप में देश-दुनिया के बाजार तक पहुंच रहा है। पारंपरिक कालानमक चावल से तैयार कुकीज़ ने उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में खरीदारों का ध्यान खींचा। सिद्धार्थनगर की मेसर्स बुद्धा डिलाइट्स को ट्रेड शो के दौरान 200 बिजनेस इंक्वायरी मिलीं, जिनकी कुल अनुमानित कारोबारी संभावनाएं करीब 4 करोड़ रुपये हैं।

फ्रांस के खरीदार से हुआ समझौता, 50 हजार कुकीज़ का ऑर्डर

यूपीआईटीएस-2026 बुद्धा डिलाइट्स के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने का अहम मंच बना। इकाई के संस्थापक डॉ. अजय कुमार रावत ने फ्रांस के एक खरीदार के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया। इसके तहत 50 हजार कुकीज़ की आपूर्ति का पक्का ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर की कुल कीमत 20 लाख रुपये है।

सिद्धार्थनगर में पैदा होने वाले कालानमक चावल से तैयार उत्पाद का फ्रांस तक पहुंचना स्थानीय कृषि उत्पाद में मूल्यवर्धन और नए बाजार की संभावनाओं को दर्शाता है। जिस कालानमक की खेती परिवार तीन पीढ़ियों से करता आया है, उसी से तैयार उत्पाद के लिए विदेश से कारोबारी ऑर्डर मिलना इस उद्यम की खास उपलब्धि है।

ट्रेड शो में आम ग्राहकों ने भी खूब पसंद कीं कालानमक कुकीज़

यूपीआईटीएस-2026 में सिर्फ कारोबारी खरीदारों ने ही नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं ने भी कालानमक से बने उत्पादों में रुचि दिखाई। बुद्धा डिलाइट्स ने बी2सी श्रेणी में ट्रेड शो के दौरान 4.70 लाख रुपये की बिक्री दर्ज की।

कालानमक कैश्यू कुकीज़, एरोमैटिक ब्राउन राइस कुकीज़, ड्राई फ्रूट शुगर फ्री कुकीज़ और जैगरी कुकीज़ जैसे उत्पादों ने पारंपरिक अनाज को आधुनिक स्वाद और ग्राहकों की जरूरत के अनुरूप पेश करने की संभावनाएं सामने रखीं।

तीन पीढ़ियों की खेती से शुरू हुई उद्यम की कहानी

बुद्धा डिलाइट्स की सफलता की शुरुआत सिद्धार्थनगर के उन खेतों से हुई, जहां डॉ. अजय कुमार रावत का परिवार तीन पीढ़ियों से कालानमक चावल की खेती करता आ रहा है।

शिक्षक पिता और गृहिणी माता के परिवार में पले-बढ़े डॉ. रावत ने राजनीति विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। उन्होंने नेचुरोपैथी योगा में भी डॉक्टरेट किया। राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर के रूप में काम करते हुए उनके मन में पारिवारिक कृषि विरासत और कालानमक चावल को नए स्वरूप में बाजार तक पहुंचाने का विचार आया।

चावल से कुकीज़ बनाने का आया विचार, पुणे से सीखी बेकरी की कला

डॉ. रावत ने कालानमक को सिर्फ चावल के तौर पर बेचने के बजाय उससे ऐसे उत्पाद तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया, जिन्हें नई पीढ़ी और आधुनिक बाजार आसानी से अपना सके। इसके लिए उन्होंने खाद्य उत्पाद निर्माण की बारीकियां सीखीं और पुणे से कुकरी एवं बेकरी में डिप्लोमा कोर्स पूरा किया।

इसके बाद कालानमक चावल के अलग-अलग रूपों पर प्रयोग किए गए। लगातार प्रयासों के बाद वर्ष 2024 में मेसर्स बुद्धा डिलाइट्स की स्थापना हुई।

परंपरागत कालानमक को मिला आधुनिक उत्पादों का रूप

डॉ. रावत ने कालानमक की मूल पहचान को बरकरार रखते हुए उसे आधुनिक खाद्य उत्पादों से जोड़ने का प्रयास किया। इसी प्रयोग के परिणामस्वरूप कालानमक कैश्यू कुकीज़, एरोमैटिक ब्राउन राइस कुकीज़, ड्राई फ्रूट शुगर फ्री कुकीज़ और जैगरी कुकीज़ जैसे उत्पाद तैयार हुए।

इस बदलाव से कालानमक का बाजार भी विस्तृत हुआ। पहले जहां यह मुख्य रूप से चावल के रूप में उपभोक्ताओं तक पहुंचता था, वहीं अब मूल्यवर्धित उत्पादों के जरिए नए उपभोक्ता वर्ग और नए बाजारों तक पहुंच बना रहा है।

3 करोड़ रुपये के करीब पहुंचा सालाना कारोबार

बुद्धा डिलाइट्स का वर्तमान वार्षिक कारोबार करीब 3 करोड़ रुपये है। यूपीआईटीएस-2026 में मिली करीब 4 करोड़ रुपये की 200 बिजनेस इंक्वायरी और फ्रांस से मिला 20 लाख रुपये का पक्का ऑर्डर उद्यम के विस्तार की संभावनाओं को बढ़ाता है।

सरकारी योजना से मिला 50 लाख रुपये का ऋण

उद्यम को विस्तार देने के लिए वित्तीय सहयोग भी मिला है। डॉ. रावत ने ‘एक जनपद एक व्यंजन पोषण वित्त योजना’ के तहत 50 लाख रुपये का ऋण लिया है। इस पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की ओर से 10 लाख रुपये की मार्जिन मनी यानी सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।

इस वित्तीय सहायता से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने और उद्यम के विस्तार की दिशा में आगे बढ़ने का आधार मिला है।

अपनी मिट्टी की पहचान को दुनिया तक पहुंचाना है सपना

डॉ. अजय कुमार रावत के लिए बुद्धा डिलाइट्स सिर्फ कारोबार नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी और उससे जुड़ी पहचान को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है। उनका उद्देश्य कालानमक की विशिष्ट सुगंध और स्वाद को मूल्यवर्धित उत्पादों के जरिए देश और दुनिया के उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है।

यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्पादों को प्रदर्शित करने, देश-विदेश के खरीदारों से सीधे संवाद करने और फ्रांस से कारोबारी ऑर्डर हासिल करने को वह अपनी उद्यम यात्रा का अहम पड़ाव मानते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति जताया आभार

डॉ. अजय कुमार रावत ने इस उपलब्धि के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच ने सिद्धार्थनगर के स्थानीय उत्पाद कालानमक चावल को देश-विदेश के खरीदारों के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर दिया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की उद्यमिता को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों, विभागीय सहयोग और ऐसे वैश्विक मंचों के जरिए छोटे एवं स्थानीय उद्यमियों को अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।

डॉ. रावत के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से उन्हें भी अपने पारंपरिक कालानमक चावल को मूल्यवर्धित उत्पादों के रूप में देश-दुनिया तक पहुंचाने का हौसला मिला है। उन्होंने यूपीआईटीएस-2026 में मंच उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री और उत्तर प्रदेश सरकार का आभार जताया।

खेत से कुकीज़ तक और सिद्धार्थनगर से फ्रांस तक पहुंची पहचान

सिद्धार्थनगर के खेतों से शुरू हुई कालानमक की यह यात्रा अब अंतरराष्ट्रीय कारोबार तक पहुंच चुकी है। तीन पीढ़ियों से जिस चावल की खेती परिवार करता आया, उसी विरासत में अगली पीढ़ी ने नवाचार जोड़ा। चावल से कुकीज़ तैयार हुईं, स्थानीय उत्पाद को नया बाजार मिला और सिद्धार्थनगर के कालानमक की पहचान फ्रांस तक पहुंची।

बुद्धा डिलाइट्स की यह कहानी दिखाती है कि परंपरा के साथ नवाचार, कौशल, वित्तीय सहयोग और बाजार का मंच जुड़ने पर स्थानीय कृषि उत्पाद को नए बाजार और वैश्विक कारोबार की संभावनाओं से जोड़ा जा सकता है।

 

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